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शनिवार, 21 जनवरी 2023

लंबी आयु की बजाय महान मृत्यु की कामना करते हैं श्रेष्ठ युवा

                   ● विचार प्रवाह :
 (धर्मवीर गुप्ता)। एक दिन महाभारत सीरियल देख रहा था। राक्षसी हिडिम्बा अपने कुल देवी के मंदिर में प्रार्थना करते हुए कह रही थी, हे माता मैं अपने पुत्र की लंबी आयु की कामना नहीं करती हूँ। मैं तो यह प्रार्थना करती हूँ कि भले ही मेरा पुत्र एक दिन जिए किन्तु इस तरह जिए की लोग उसे सदैव याद करें। उसका नाम अमर हो।  उस पुत्र ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि में ऐसा युद्ध किया कि उसने अपना और अपने  माता पिता का नाम इतिहास में अमर कर लिया। राक्षस कुल में जन्म लेने वाली हिडिम्बा के इन वाक्यों ने मेरे हृदय को प्रभावित किया। मैं यह चिंतन करने पर विवश हो गया कि राक्षस कुल में जन्म लेने वाली माँ यदि अपने कुलदेवी से अपने पुत्र के लिए यह कामना कर सकती है तो यह कामना ईश्वर की श्रेष्ठ रचना में जन्म लेने वाले माता पिता क्यों नहीं कर सकते हैं? प्रत्येक माता पिता के लिए यह प्रसंग प्रेरणा देने वाला है।  राष्ट्र को नई दिशा देने वाले महानायक भी तभी मिलेंगे जब माता पिता अपने इष्ट देव से ऐसा ही आशीर्वाद मांगेंगे।
    " भगत सिंह को राष्ट्र प्रेम की प्रेरणा भी अपने परिवार से ही मिली। इस प्रेरणा ने अल्पायु में ही उन्हें अमर बना दिया। माता पिता ने उनके विवाह की बात की। भगत सिंह ने इंकार कर दिया। उन्होंने राष्ट्र को अपना सम्पूर्ण जीवन ही समर्पित कर दिया। भगत सिंह ने कभी लंबी आयु की कामना नहीं की। उन्होंने छोटी उम्र में ही वह कर दिखाया जो सौ वर्ष जीने के बाद भी लाखो लोग नहीं कर पाए। जेल में भगत सिंह ने मां को वचन दिया कि वह फांसी पर चढ़ने से पूर्व भी इन्कलाब जिंदाबाद का नारा लगायेंगे। उन्होंने यह वचन भी पूरा किया। अंग्रेजों द्वारा दी जा रही असहनीय प्रताड़नाओं को भी वे सहते रहे क्योंकि वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित थे। वह लक्ष्य था देश की आजादी के लिए युवाओं में साहस और त्याग का भाव भरना और वे अपने लक्ष्य में सफल भी रहे। "
      आज प्रत्येक व्यक्ति सौ वर्ष जीवन जीने की आशा करता है। भले ही जीवन कष्टमय हो, वह निरंतर बीमार चल रहा हो। चलने फिरने में असमर्थ व्यक्ति भी पोते-पोतियों, नाती, नातिन के विवाह या अन्य इच्छा को पूरा करने के लिए जीना चाहता है किंतु महापुरुषों ने कभी इसकी इच्छा नहीं की। उन्होंने अपने जीवन को कम उम्र में ही धन्य कर लिया और अपने साथ ही माता पिता के नाम को भी अमर कर दिया। माता पिता भी अपने पुत्र पुत्री की लंबी आयु की कामना करते हैं किंतु वे उसे श्रेष्ठ कार्य करने के लिए प्रेरित नहीं करते नहीं दिखते हैं।
                 माता पिता की प्रेरणा पुत्र को महापुरुष बना देती है। यदि माता पिता शिशु जीवन से कर्तव्यनिष्ठा, समाज और राष्ट्र प्रेम की भावना से भरे हैं , पुत्र पुत्री को प्रतिदिन प्रेरित करते हैं तो निश्चित ही वे पुत्र पुत्री श्रेष्ठ नागरिक साबित होंगे । शिवा जी इतिहास प्रसिद्ध इसलिए बन सके क्योंकि उनकी माता ने उन्हें प्रेरित किया। प्रत्येक व्यक्ति को लंबी आयु जीने की अपेक्षा श्रेष्ठ जीवन जीने की कामना करनी चाहिए। जो जीवन मिला है उसे श्रेष्ठ कार्यों में लगाना चाहिए। परोपकार में बिताना चाहिए। राष्ट्र और समाज की उन्नति के लिए समर्पित करना चाहिए।

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