सम्पूर्णानगर-खीरी। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के ओझागंज स्थित इदारा मरकज तरबियाते इफ्ता एशिया के चुनिंदा शैक्षणिक संस्थानों में शामिल है। जहां केवल मुफ्ती कोर्स की ही पढ़ाई होती है। इस संस्थान में दाखिला लेना काफी कठिन है ।इसका अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि सत्र- 2020-21 में पूरे भारत से केवल 5 ही छात्र चयनित हुए थे
आपको बता दें इसी संस्थान में सम्पूर्णानगर थाना क्षेत्र के गाँव गोविंद नगर निवासी मुस्ताक अहमद बरकाती का बेटा मुफ्ती मुहम्मद आबिद रजा बरकाती अहसनी भी उन पाँच छात्रों में शामिल रहा। इसी संस्थान के जरिये आबिद रजा को सबसे कम उम्र में दीनी शिक्षा की सफलता के शिखर पर पहुंचने का सौभाग्य हासिल हुआ। आबिद के पिता ने जानकारी देते हुए बताया कि दो दिन पूर्व ओझागंज स्थित उसके विद्यालय में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। उस कार्यक्रम में मेरे पुत्र आबिद को डिग्री देने के साथ उपहार, फूल-मालाओं से स्वागत और सम्मानित किया गया। उसकी शिक्षा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि - इस्लाम धर्म में मुफ्ती एक कानूनी विशेषज्ञ होता है। जिसका धार्मिक मामलों पर निर्णय देने या सलाह देने का अधिकार होता है। मुफ्ती हज़रात के ही द्वारा फतवे जारी किए जाते हैं। फतवा एक राय है जो मुसलमान कई विषयों पर मांगते हैं,जैसे - तलाक, नमाज, रोजा, संपत्ति एवं सामान्य मुद्दे सहित अन्य मामले जुड़े हुए होते हैं।
इस शिक्षा की पात्रता :
जो छात्र किसी इस्लामिक मदरसा द्वारा प्रस्तावित 'फाजिल कोर्स' पास कर चुके हैं, वे दो वर्ष की अवधि के मुफ्ती कोर्स के लिए पात्र होते हैं आबिद रजा बरकाती अहसनी शुरु से ही होनहार छात्र रहा है उसकी शुरुआती शिक्षा पूरनपुर के अलरजा के नाज़रे से तालीम की शुरुआत की थी वह महज 2 या 3 तक तालीम हासिल किया। यहीं कुछ समय तक मौलवी की शिक्षा भी हासिल की। इसके बाद देशभर में मशहूर कस्बा मारहरा स्थित मदरसे से आलमियत का कोर्स पूरा किया और वहीं से ही फ़ाज़िल कोर्स पूरा करके डिग्री प्राप्त की। इसके बाद विश्व स्तरीय मुफ्ती का टेस्ट पास किया और ओझागंज स्थित इदारा मरकज तरबियाते इफ्ता में प्रवेश लेकर दो वर्ष तक 2 वर्ष के कोर्स मुफ्ती की पढ़ाई लगन से पूरी की और डिग्री प्राप्त की। उसको विद्यालय में सम्मानित किए जाने के दौरान उसके मित्र शमशाद आदि भी वहाँ पहुँचे थे।
रिपोर्ट-गोविन्द कुमार,सम्पूर्णानगर
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