मधवापुर प्रखंड के कायस्थ टोला पिरौखर गांव में 1934 से लेकर अभी तक जरी है कीर्तन जिनका नाम हरि ॐ कीर्तन भवन है।
इस कीर्तन भवन के बारे में बताया जाता है कि सन् 1934 ई० में बिहार में भयानक भूकंप आया था। जिसमें बिहार के मधुबनी और सीतामढी में भरी तबाही आई थी। जगह जगह धरती फट गई थी और दरारे आ गई थी कही कही धरती में से आग, पानी तक आ गया था। गांव के लोग बहुत भयभीत थे, समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे ? उसी समय कायस्थ टोला पिरौखर में एक साधु महात्मा आए हुए थे उन्होने एक खंती धरती में गार दिए और बताया कि इस जगह कीर्तन और रामायण पाठ करने से गांव में भूकंप का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। गांव के सभी लोग भगति भाव से कीर्तन और रामायण पाठ करने लगे। उसी प्रकार जैसे साधु महात्मा ने बताया था गांव में कुछ नही हुआ। न धरती में दरारें आई और न ही कोई जान माल की छती हुईं । आज तक यहां के लोग प्रत्येक मगंलवार को कीर्तन और रामायण पाठ करते हैं। इनके बारे में मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान् की प्रार्थना करते हैं भगवान उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। जो की आज के समय में यह 88 वर्ष पूर्ण कर चुका है। कीर्तन के बगल में ही ॐ कारनाथ महादेव मंदिर जिसका स्थापना 1995 ई० पूर्व , हनुमान मंदिर 2000 ई० और पोखर स्थित है। जिस पूरे क्षेत्र को ॐ कारनाथ महादेव मंदिर के प्रांगण के नाम से विख्यात है। यहां वर्ष में कई बार रामकथा, भागवतकथा, शिवपुराण, अष्टायम, सुंदरकांड पाठ, विवाह कीर्तन जैसे कई धार्मिक कार्य होते रहते हैं। बताता जाता है कि पहले के वर्ष में विवाह पंचमी के अवसर पर साधु संत यही विश्राम करके जनकपुरधाम जाते थे। उपयुक्त जानकारी ॐ कारनाथ महादेव मंदिर के वरिष्ठ सदस्य प्रभाष कर्ण ने दिया हैं। उन्होंने बताया कि 88 वर्ष पूर्ण होने पर मंदिर में अनेकों धार्मिक कार्य किए जायेंगे तथा मंदिर वर्किंग कमेटी के सदस्यो को सम्मानित किया जाएगा ।
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