लखीमपुर खीरी। लावारिस पशुओं से किसान परेशान हैं तो वहीं राहगीरों के लिए भी यह खतरा बने हुुए हैं। अब अच्छी खबर यह है कि जल्द ही 30 नवंबर 2022 तक 105 नए अस्थायी गोआश्रय केंद्र बनकर तैयार हो जाएंगे। इनमें करीब 10 हजार पशुओं को रखा जा सकेगा।
जनपद में वर्तमान में कुल 48 गोआश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें कुल 18070 गोवंशीय पशु संरक्षित किए जा चुके हैं। इनमें से 5777 पशु सहभागिता योजना के तहत ग्रामीणों की सुपुर्दगी में दिए गए हैं। पशुपालन विभाग द्वारा कराए गए सर्वे के मुताबिक, 4061 गोवंशीय पशु लावारिस हाल में इधर-उधर सड़कों पर डेरा डाले हुए हैं तो कभी कभार यह खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इस वर्ष हुए विधानसभा चुनाव के दौरान लावारिस पशुओं का मुद्दा भी जोर-शोर उठाया गया था, जिससे पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वयं चुनाव के बाद लावारिस पशुुओं की समस्या से किसानों को छुटकारा दिलाने का आश्वासन दिया था।योगी सरकार 2.0 में नए अस्थायी गोआश्रय स्थलों के निर्माण के लिए सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने वृहद स्तर पर अभियान छेड़ा और न्याय पंचायत स्तर पर अस्थायी गोआश्रय केंद्र स्थापित करने की मुहिम चलाई थी। पहले 30 न्याय पंचायतों में अस्थायी गोआश्रय स्थलों के निर्माण का कार्य प्रारंभ कराया गया, जिसके कुछ दिनों बाद और 75 अस्थायी गोआश्रय स्थलों के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ।
सीडीओ ने बताया कि 30 गोआश्रय स्थल लगभग पूर्ण हो गए हैं, जो इसी महीने संचालित होने लगेंगे। प्रत्येक गोआश्रय स्थल में 50 से 250 पशुओं को संरक्षित करने की क्षमता है। इसके अलावा 75 अन्य गांवों में नए गोआश्रय स्थल बनाने की शुरुआत हो चुकी है, जिन्हें 30 नवंबर 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है।वर्तमान में करीब चार हजार लावारिस गोवंशीय पशु सड़कों के किनारे आसरा बनाए हुए हैं, जिन्हें संरक्षित करने के लिए 105 नए गोआश्रय स्थल निर्माणाधीन हैं। यह निर्माणाधीन गोआश्रय स्थल 30 नवंबर 2022 तक पूर्ण हो जाएंगे। इसके बाद सभी लावारिस पशुओं को इनमें संरक्षित किया जाएगा। इससे किसानों व राहगीरों की समस्या का इसी वर्ष निदान हो जाएगा।
- अनिल कुमार सिंह, सीडीओ
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