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शनिवार, 11 अप्रैल 2026

Lmp. 27 वर्षों बाद फिर महका कुंवर ख़ुस्वक्त राय स्कूल का आंगन, जीवंत हुई गुरु-शिष्य परम्परा

⚫ 27 वर्षों बाद फिर महका कुंवर ख़ुस्वक्त राय स्कूल का आंगन, बना गुरु - शिष्य के अमर रिश्ते का संगम

लखीमपुर. लखीमपुर-खीरी के हृदय में स्थित कुंवर ख़ुस्वक्त राय स्कूल जो 80 और 90 के दशक में शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों का प्रतीक रहा, एक बार फिर अपनी पुरानी गरिमा के साथ जीवंत हो उठा। वर्ष 1998-99 बैच के पूर्व छात्र-छात्राओं ने 27 वर्षों बाद केवल एक सामान्य मिलन का आयोजन नहीं किया, बल्कि इसे गुरु-शिष्य परंपरा के अद्भुत उत्सव में बदल दिया। इस विशेष रीयूनियन की सबसे भावुक बात यह रही कि पूर्व छात्रों ने लगभग 50 से अधिक शिक्षकों को खोजकर उन्हें आमंत्रित किया और सम्मानित किया। वर्षों बाद अपने शिष्यों के बीच लौटे शिक्षक चाहे वे हरदोई, शाहजहांपुर, सीतापुर, लखनऊ या प्रयागराज से आए हों, अपनी आंखों में गर्व और स्नेह के आंसू समेटे हुए थे। विद्यालय की नींव रखने वाली सरोजिनी गुप्ता दीदी की दूरदर्शिता और संस्कारों की छाप आज भी स्पष्ट दिखाई देती है। वर्तमान में विजय गुप्ता के कुशल प्रबंधन और प्रधानाचार्य भारती दीदी के नेतृत्व में यह विद्यालय निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय प्रार्थना और स्वागत के साथ हुई। विजय गुप्ता ने विद्यालय के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला, वहीं दिवंगत शिक्षकों और साथियों को श्रद्धांजलि देकर वातावरण को भावुक बना दिया गया। पूर्व छात्रों द्वारा प्रस्तुत एक नाट्य मंचन ने पूरे शैक्षणिक वर्ष की स्मृतियों को जीवंत कर दिया। इस आयोजन की नींव 14 जनवरी को निहारिका और विशाल ने रखी थी, जिन्होंने एक व्हाट्सएप समूह बनाकर “ईच वन, रीच वन” की भावना से सभी साथियों को जोड़ा. लखीमपुर से हरविंदर और स्वीटी ने आयोजन की बागडोर संभाली, जबकि लवली, शुभा, नवीन, सौरभ, रजनी दीप्ति, अनुज, सौम्या और नीतू सहित पूरी टीम ने मंच संचालन, स्किट, रिटर्न गिफ्ट और मोमेंटो जैसी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया. रीयूनियन में प्रमुख रूप से शिक्षिकाओं में उर्मिला मिश्रा, नीलम मिश्रा, दिनेश श्रीवास्तव, दीप्ति रानी, दीनेश्वरी दीक्षित, प्रमिला गुप्ता, पूनम तोमर, रेखा तिवारी, छमा शर्मा, सुधे जौहरी, मोहिनी रस्तोगी, भारती, दीप्ति, शशि मिश्रा, सुनीता दीक्षित, नीरा, बलूनी, रश्मि, निशा, उर्मिला, रागिनी, शांति वर्मा, दिनेश, दिनेश्वरी, नीलम मिश्रा, पूनम सिंह तोमर, पूनम सिंह उपस्थित रहीं। वहीं छात्र-छात्राओं में रतिका, आशुतोष, मयंक, कुलदीप, संदीप, अमरजीत, मुनीश, अभिषेक, शोभित, शशिकांत, सनी, अर्चना, चन्दन, खुशबू, प्रज्ञा, विवेक, चमन, चंद्रजीत, प्रवीण, कपिल, अर्पित, सदफ़, प्रशांत, देवेंद्र, आदर्श, विशाल, निहारिका, स्वीटी, हरविंदर, सौरभ, शिखा, नवीन, अनुज, सतबीर, हरप्रीत, रजनी, आदर्श, नीतू, प्रियंका, राखी, खुशबू और नेहा सहित सैकड़ों पूर्व छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
जब वर्षों बाद साथी एक-दूसरे से मिले, तो भावनाएं शब्दों से परे थीं आंखें नम थीं, दिल खुश था और यादें फिर से जीवित हो उठीं। शिक्षकों को मोमेंटो देकर सम्मानित करना, केवल औपचारिकता नहीं बल्कि उस ऋण को स्वीकारना था, जो उन्होंने जीवनभर के लिए दिया। यह रीयूनियन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि यह प्रमाण था कि सच्ची शिक्षा केवल किताबों में नहीं, बल्कि रिश्तों, संस्कारों और स्मृतियों में बसती है जो समय के साथ और भी गहरी होती जाती है।

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