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रविवार, 26 अप्रैल 2026

‘मन की बात’ में गूंजा आत्मनिर्भर भारत का स्वर, देखिए! और क्या बोले पीएम मोदी?

🔘 ‘मन की बात’ में गूंजा आत्मनिर्भर भारत का स्वर

नई दिल्ली। जब देश की धड़कनों को शब्द मिलते हैं, जब आमजन की उपलब्धियाँ राष्ट्रगान सी प्रतीत होती हैं तब जन्म लेता है एक ऐसा संवाद, जो केवल शब्द नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत बन जाता है। मन की बात के 133वें एपिसोड में पीएम नरेंद्र मोदी ने कुछ ऐसा ही भावपूर्ण संवाद देशवासियों से साझा किया, जहाँ विज्ञान की ऊँचाइयाँ थीं, ऊर्जा का उज्ज्वल भविष्य था और शांति का वैश्विक संदेश भी। प्रधानमंत्री के स्वर में गर्व था, जब उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल कर ली है। यह केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के आत्मनिर्भर और शक्तिशाली भविष्य का संकेत है। यह वह क्षण है जब भारतीय वैज्ञानिकों की तपस्या राष्ट्र की ताकत बनकर सामने आई है, एक ऐसा कदम जो ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इसी गर्व के साथ उन्होंने एक अदृश्य शक्ति, पवन ऊर्जा, का भी स्मरण कराया। “यह शक्ति दिखाई नहीं देती, लेकिन जीवन की हर गति में समाई है,” उनके शब्दों में एक गहरी संवेदना थी। आज जब भारत 56 गीगावाट से अधिक पवन ऊर्जा क्षमता के साथ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत बन चुका है, तो यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि हर उस हवा का सम्मान है जो देश के विकास को गति दे रही है। लेकिन यह संवाद केवल उपलब्धियों तक सीमित नहीं था। प्रधानमंत्री ने वैश्विक तनाव और संघर्षों के बीच एक गहन संदेश भी दिया शांति का, आत्मविजय का। उन्होंने गौतम बुद्ध के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि सच्ची जीत भीतर की होती है, और शांति की शुरुआत भी हमारे अपने मन से ही होती है। आज जब विश्व अशांति के दौर से गुजर रहा है, तब बुद्ध का यह संदेश मानवता के लिए एक प्रकाशस्तंभ बन सकता है। उन्होंने आने वाले बुद्ध पूर्णिमा की अग्रिम शुभकामनाएँ देते हुए देशवासियों को आत्मचिंतन और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी, एक ऐसा मार्ग जो न केवल व्यक्ति, बल्कि पूरे विश्व को शांति की ओर ले जा सकता है।
संवाद के इस सिलसिले में उन्होंने भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का भी उल्लेख किया, जहाँ सुभाष चंद्र बोस की जयंती से लेकर महात्मा गांधी की पुण्यतिथि तक ‘गणतंत्र उत्सव’ मनाया जाता है। इस उत्सव का चरम है बीटिंग रिट्रीट समारोह, एक ऐसा दृश्य, जहाँ संगीत की धुनों में भारत की विविधता और एकता दोनों साथ गूंजती हैं। सेना और सुरक्षा बलों के बैंड्स की प्रस्तुतियाँ केवल सुरों का संगम नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति की भावनाओं का जीवंत चित्रण होती हैं। इस प्रकार ‘मन की बात’ का यह एपिसोड केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक प्रेरक यात्रा बन गया, जहाँ विज्ञान ने आत्मविश्वास दिया, ऊर्जा ने भविष्य को रोशन किया और बुद्ध के संदेश ने मन को शांति का मार्ग दिखाया। यह वह संवाद है जो हर भारतीय के भीतर यह विश्वास जगाता है कि जब संकल्प सच्चा हो, तो हर हवा, हर विचार और हर प्रयास राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक नई कहानी लिख सकता है।

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