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मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

शब्दों की जुगलबंदी में चमका लखीमपुर का सितारा, ‘अमर’ की कलम ने रचा इतिहास

🔘 शब्दों की जुगलबंदी में चमका लखीमपुर का सितारा, ‘अमर’ की कलम ने रचा इतिहास

लखीमपुर। जनपद खीरी की पावन मिट्टी ने एक बार फिर अपनी साहित्यिक उर्वरता का परिचय दिया है। जब शब्दों की दुनिया में भावनाओं का संगम हुआ, संवेदनाओं ने स्वर लिया और सृजन ने समय की सीमाओं को लांघा, तब उभरा एक नाम, राम मोहन गुप्त ‘अमर’, जिन्होंने अपनी लेखनी से न केवल प्रतियोगिता जीती, बल्कि जनपद का मान भी ऊँचा कर दिया।

‘लेखक हिन्दी के’ मंच द्वारा आयोजित ऑनलाइन “शायरी ए जुगलबंदी” आशु लेखन काव्य प्रतियोगिता, अपने आप में एक अनोखा रचनात्मक उत्सव बन गई। देश-विदेश से जुड़े सृजनकारों ने एक ही मंच पर, एक ही समय में, दिए गए शब्द “मुद्दत” को केंद्र में रखकर अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। मात्र एक घंटे के सीमित समय में, जहां कई प्रतिभाएं अपनी क्षमता का परिचय दे रही थीं, वहीं ‘अमर’ की कलम जैसे निरंतर बहती धारा बन गई। उत्साह, अनुशासन और सृजनशीलता के अद्भुत समन्वय के साथ राम मोहन गुप्त ‘अमर’ ने 55 उत्कृष्ट रचनाओं का सृजन कर प्रथम स्थान पर अपना अधिकार स्थापित किया। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि यह उस साधना का परिणाम था, जिसमें शब्द साधक अपने विचारों को समाज की चेतना से जोड़ता है। मंच के संपादक कृष्ण चतुर्वेदी, कार्यकारी संपादक डॉ. मधुछंदा चक्रवर्ती एवं संचालक शायरा नेहा पंडित ने ‘अमर’ को विजेता प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उनकी रचनात्मक ऊर्जा की मुक्तकंठ से सराहना की। यह सम्मान केवल एक प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि उस साहित्यिक समर्पण की पहचान है जो निरंतर समाज को दिशा देता है। 

राम मोहन गुप्त ‘अमर’ पहले से ही अपने आशु लेखन, काव्य सृजन और प्रभावी मंच संचालन के लिए एक सशक्त पहचान बना चुके हैं। चार पुस्तकों और अनेक साझा काव्य संग्रहों में प्रकाशित उनकी रचनाएं, उनके साहित्यिक सफर की गहराई को दर्शाती हैं। साथ ही, समाजसेवी और प्रशिक्षक के रूप में उनका योगदान उन्हें और भी विशिष्ट बनाता है। आज जब शब्दों का महत्व बदलते समय में कहीं खोता सा प्रतीत होता है, ऐसे में ‘अमर’ जैसे रचनाकार यह सिद्ध करते हैं कि सच्ची लेखनी केवल लिखती नहीं, वह जागृत करती है, जोड़ती है और समाज को नई दिशा देती है। लखीमपुर-खीरी आज गर्व से कह सकता है उसकी धरती पर शब्दों का एक सच्चा साधक जन्मा है, जो हर “मुद्दत” को “अमर” बना देता है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. माँ वीणापाणी की सद्कृपा से संभव हुआ सब
    स्नेह संबल रहा सभी का सर्व सहाय हुए प्रभु।
    🙏🏻
    आप द्वारा व्यक्त किए गए प्रेरणा प्रद शब्द खुशबू बन कर दिल ओ दिमाग़ मे रच बस गए, निश्चित ही अनिल का सृजन बेहिसाब लाजवाब है, हार्दिक आभार

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