सीमैप के पी-एच.डी. उपाधि धारक डॉ. कुमार ने अपनी लगन और मेहनत से किया देश का नाम रोशन, हासिल किया अमेरिका का नेशनल फेलोशिप अवार्ड
-------------------------------------
लखनऊ। राजधानी स्थित केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) से पी-एच.डी. उपाधि धारक डॉ. सौरभ कुमार ने अमेरिका की प्रतिष्ठित जूडिथ ग्राहमपूल पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च फ़ेलोशिप अवार्ड हासिल करने का गौरव हासिल किया है। डॉ. कुमार की यह उपलब्धि उनकी मेहनत, लगन और वैज्ञानिक उत्कृष्टता का प्रतीक है, जो भारतीय विज्ञान के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का द्योतक है। उनकी उपलब्धि पर विज्ञान जगत से जुड़े लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।
उल्लेखनीय है कि डॉ. कुमार वर्तमान में वे वेर्सिटी ब्लड रिसर्च इंस्टिट्यूट, मिलवॉकी (अमेरिका) में पोस्ट डॉक्टोरल स्कॉलर के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें अमेरिका के नेशनल ब्लीडिंग डिसऑर्डर्स फाउंडेशन द्व्रारा वर्ष 2024 की प्रतिष्ठित जूडिथ ग्राहमपूल पोस्टडॉक्टोरल रिसर्च फ़ेलोशिप से सम्मानित किया गया है। इस प्रतिष्ठित फेलोशिप के लिए उन्हें आगामी दो वर्षो में शोध कार्य को पूरा करना होगा। उनकी यह कामयाबी देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है
ध्यातव्य है कि डॉ. कुमार लखनऊ के इटौंजा निवासी भानु प्रताप सिंह एवं मीरा सिंह के दामाद हैं। सिंह दम्पति की कनिष्ठ पुत्री डॉ. प्राची सिंह अमेरिका में पोस्ट डॉक्टोरल उपाधि हेतु अध्ययनरत हैं। डॉ. कुमार डॉ. प्राची सिंह के पति हैं। डॉ. कुमार ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी से माइक्रोबायोलॉजी में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एरोमैटिक एंड मेडिसिनल प्लांट्स (सीमैप), लखनऊ से किया गया उनका शोध प्लेटलेट आधारित जीन थेरेपी के माध्यम से इम्यून टॉलरेंस विकसित करने पर केंद्रित है, जो फूड एलर्जी और हीमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार में नई संभावनाएँ खोल रहा है। मधुबनी (बिहार) में जन्में और उत्तर प्रदेश में एमएससी और शोध उपाधि हासिल करने वाले डॉ. कुमार द्वारा यह उपलब्धि अर्जित करने पर उनके स्वजनों और अकादमिक मार्गदर्शकों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। स्वजनों का कहना है कि डॉ. कुमार द्वारा वैश्विक स्तर पर पहचान बनाना हमारे परिवार के लिए गर्व की बात है। यह देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनके एक अकादमिक मार्गदर्शक ने बताया कि सौरभ शुरू से ही मेहनती और नवाचार-प्रधान शोधकर्ता रहे हैं। यह सम्मान उनके निरंतर परिश्रम और वैज्ञानिक दृष्टि का परिणाम है। वेर्सिटी ब्लड रिसर्च इंस्टिट्यूट अमेरिका के एक वरिष्ठ शोध सहयोगी ने भी उनकी उपलब्धि को सराहते हुए बताया कि डॉ. कुमार का शोध रक्त विकारों और इम्यून-मेडिएटेड रोगों के उपचार में नई दिशा प्रदान कर रहा है। भारत से अमेरिका तक का डॉ. सौरभ कुमार का सफर यह दर्शाता है कि प्रतिभा, अनुशासन और समर्पण के बल पर ग्रामीण युवा भी वैश्विक मंच पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Post Comments