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मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

Lmp. 22 व 28 फरवरी को झुकी झोपड़ियों से उठेगी इंसाफ की आवाज़, दिव्यांगों की संवेदनशील पीड़ा बनेगी आंदोलन

22 व 28 फरवरी को झुकी झोपड़ियों से उठेगी इंसाफ की आवाज़, 

दिव्यांगों की संवेदनशील पीड़ा बनेगी आंदोलन


लखीमपुर खीरी । जहाँ एक ओर विकास की ऊँची इमारतों की बातें होती हैं, वहीं ग्रामीण अंचलों में दिव्यांगजन आज भी पॉलिथीन से ढकी झुकी झोपड़ियों में जीवन की जंग लड़ रहे हैं। राष्ट्रीय विकलांग पुनर्वास एवं कल्याण प्रशिक्षण संस्था, उत्तर प्रदेश द्वारा वर्षों से इन पीड़ाओं को प्रशासन तक पहुँचाया जा रहा है, किंतु ज़मीनी हकीकत आज भी अनसुनी है। वर्ष 2023 से अब तक 150 से अधिक आवेदन जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुँच चुके हैं, परंतु न जाँच हुई, न सुनवाई बस उम्मीदों की फाइलें धूल फाँकती रहीं।
दर्द तब और गहरा हो जाता है, जब गरीब दिव्यांगों को उनके हक के आवास के लिए दर दर भटकना पड़ता है, जबकि कथित रूप से ₹30,000 की मांग पूरी करने वालों के घर बिना रोक टोक बन जाते हैं। यह केवल प्रशासनिक उदासीनता नहीं, बल्कि संवेदनाओं पर पड़ा कठोर आवरण है। इसी अन्याय के विरुद्ध अब आवाज़ संगठित हो रही है। 22 फरवरी 2026 को ब्लॉक फूलबेहद, बिजुआ और पलिया तथा 28 फरवरी 2026 को गोला व नकहा ब्लॉकों में दिव्यांगजनों के साथ व्यापक बैठकें आयोजित की जाएँगी। उद्देश्य एक ही हर जरूरतमंद को उसका हक दिलाना। जब तक आवास समस्या का समाधान नहीं होगा, यह संघर्ष थमेगा नहीं। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद कुमार श्रीवास्तव का कहना है “यह केवल मांग नहीं, सम्मानपूर्ण जीवन की पुकार है। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन विकराल रूप ले सकता है।” झुकी झोपड़ियों में रहने वालों की आँखों में आज भी उम्मीद की लौ जल रही है कि एक दिन उनके सिर पर भी पक्की छत होगी, और उनका जीवन भी सम्मान के साथ मुस्कुरा सकेगा।

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