🔘 कुंवर ख़ुस्वक्त राय स्कूल 1998, 99 बैच का भावनात्मक पुनर्मिलन बना स्मृतियों का डिजिटल संगम
दिनांक 1 फ़रवरी 2026 को समय की लंबी दूरी को लांघते हुए कुंवर ख़ुस्वक्त राय स्कूल के 1998, 99 बैच के छात्र छात्राओं ने एक ऐतिहासिक और भावनात्मक ऑनलाइन पुनर्मिलन का आयोजन किया। यह कोई साधारण बैठक नहीं थी, बल्कि स्मृतियों, संस्कारों और साझा बचपन की खुशबू से भरा एक जीवंत उत्सव था, जहाँ 27 वर्षों बाद पुराने मित्रों ने एक दूसरे को देखा तो आँखें नम और दिल भाव विभोर हो उठे।
लखीमपुर, लखनऊ, सफ़ेदाबाद, नासिक, कानपुर, काशीपुर, दिल्ली, नोएडा के साथ-साथ अमेरिका और ब्रिटेन से जुड़े साथियों ने जब स्क्रीन पर मुस्कुराते चेहरे देखे, तो मानो समय ठहर गया। इस पुनर्मिलन की नींव लगभग एक माह पूर्व निहारिका और विशाल ने रखी। पहले एक व्हाट्सऐप ग्रुप बना, फिर “ईच वन, खींच वन” की भावना के साथ मित्र जुड़ते चले गए और देखते ही देखते यह कारवां 150 से अधिक साथियों तक पहुँच गया। ऑनलाइन मिलन की शुरुआत पारस्परिक परिचय से हुई, जहाँ हर साथी की वर्तमान यात्रा सामने आई। शिखा नोएडा में वेलनेस कोच के रूप में जीवन को स्वस्थ दिशा दे रही हैं, रितिका डिप्टी कमिश्नर (इंडस्ट्री) के पद पर हैं, गरिमा सीतापुर में भविष्य की पीढ़ी को बेहतर शिक्षा का संबल दे रही हैं, सौम्या अपना स्कूल संचालित कर रही हैं। सौरभ आईडीबीआई बैंक, अनुज आईसीआईसीआई बैंक, प्रियंक और सुयश बैंक ऑफ़ बड़ौदा, अर्पित एक्सिस बैंक से जुड़े हैं। हरविंदर अपने जिले में प्रख्यात छोले भटूरे के रेस्ट्रो के लिए पहचाने जाते हैं। प्रेसिका उत्तराखंड में और अर्चना तिकुनिया में व्यवसाय संभाल रही हैं। बैठक में अमेरिका से मोनिका, ब्रिटेन से मेघना के साथ लखीमपुर से प्रियंका, खुशबू, ऋचा, विशाख, मयंक, अभिषेक, अनुज गुप्ता, सनी गोयल सहित 50 से अधिक मित्रों की सक्रिय सहभागिता रही। स्कूल के दिनों के किस्से, शरारतें, उपलब्धियाँ और सपने सब कुछ एक एक कर जीवंत हो उठा। इस स्मृतिमय अवसर पर सभी ने अपने आदरणीय शिक्षकों मेहरोत्रा दीदी, रस्तोगी दीदी, संध्या दीदी, पूनम दीदी, दिनेश दीदी, नीलम दीदी, भारती दीदी सहित अनेकों दीदियों को कृतज्ञता और स्नेह के साथ याद किया, जिनके संस्कार आज भी जीवन-पथ को आलोकित कर रहे हैं। पुनर्मिलन का समापन एक साझा संकल्प के साथ हुआ, आगामी मई या जून में आमने सामने (फेस टू फेस) पुनर्मिलन का आयोजन किया जाएगा। यह डिजिटल मिलन न केवल मित्रता की पुनर्स्थापना था, बल्कि यह प्रमाण भी कि समय बदल सकता है, दूरी बढ़ सकती है पर स्कूल की दोस्ती और गुरुजनों के संस्कार सदैव अमर रहते हैं।
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