🔘 सेवा, संवेदना और सशक्त संकल्प की प्रतीक हैं नवागत एसपी खीरी डॉ.ख्याति गर्ग
जनजागरण डेस्क। कर्तव्य, करुणा और कठोर अनुशासन इन तीनों का संतुलित संगम यदि किसी व्यक्तित्व में साकार दिखता है, तो वह नाम है डॉ. ख्याति गर्ग, आईपीएस। उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की इस मेधावी अधिकारी का जनपद लखीमपुर खीरी के पुलिस अधीक्षक के रूप में आगमन, केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि एक नई चेतना, नई ऊर्जा और नए विश्वास का सूत्रपात है।
12 सितंबर 1988 को हरियाणा की धरती पर जन्मीं डॉ. ख्याति गर्ग ने चिकित्सा जैसे मानवीय पेशे से निकलकर राष्ट्रसेवा का कठिन मार्ग चुना। एमबीबीएस की डिग्री उनके पास केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि संवेदना, मानवीय समझ और पीड़ा को महसूस करने की क्षमता का प्रमाण है। यही कारण है कि उनकी पुलिसिंग में कठोरता के साथ साथ मानवीय दृष्टि भी समान रूप से दिखाई देती है। अपने सेवा काल में उन्होंने यह सिद्ध किया कि पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज की सहभागी शक्ति भी हो सकती है। अमेठी जनपद में “कॉप टॉक” जैसी अभिनव पहल के माध्यम से उन्होंने पुलिस और जनता के बीच संवाद, विश्वास और सहयोग की एक नई संस्कृति विकसित की। यह प्रयोग उनकी दूरदृष्टि और समाज के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण बना। हाल ही में मुरादाबाद में 9वीं वाहिनी पीएसी की कमांडेंट के रूप में उन्होंने नेतृत्व, अनुशासन और संगठन क्षमता की ऐसी छाप छोड़ी, जो उन्हें एक सशक्त, निर्णयक्षम और प्रेरणादायी अधिकारी के रूप में स्थापित करती है। उनका नेतृत्व आदेश से नहीं, आदर्श से चलता है और यही उन्हें विशिष्ट बनाता है। अब लखीमपुर खीरी की धरती पर उनका पदार्पण, शक्ति चेतना के जागरण का संकेत है। यह विश्वास दृढ़ होता है कि उनके नेतृत्व में जनपद में कानून व्यवस्था केवल सुदृढ़ नहीं होगी, बल्कि अपराधमुक्त, सुरक्षित और खुशहाल वातावरण का निर्माण भी होगा। डॉ. ख्याति गर्ग उन विरल व्यक्तित्वों में हैं, जिनके लिए वर्दी सत्ता का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा का संकल्प है; जिनके लिए अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व सर्वोपरि है। उनका नाम आने वाले समय में लखीमपुर खीरी के इतिहास में न्याय, निष्ठा और निर्भीक प्रशासन के स्वर्णाक्षरों में अंकित होगा ऐसी आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Post Comments