🔘 रंगों में रचे-बसेगा तराई का अपनापन, 7 मार्च को नोएडा में सजेगा होली मिलन का महाउत्सव
नोएडा। जब फागुन की बयार में स्मृतियों के कनेर खिलते हैं और मन अपने गाँव देहात की पगडंडियों पर लौटना चाहता है, तब प्रवास में बसे लोगों के लिए “होली” केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जड़ों से जुड़ने का पावन अवसर बन जाती है। इसी आत्मीय भावभूमि पर 7 मार्च को दोपहर 12:30 बजे सेक्टर-22 नोएडा स्थित तराई वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा सैफरॉन बैंकेट में भव्य तराई होली मिलन समारोह का आयोजन किया जा रहा है।
यह आयोजन केवल रंग गुलाल का उत्सव नहीं, बल्कि उन सैकड़ों हृदयों का मिलन है जो शिक्षा, व्यवसाय, स्वास्थ्य, रोजगार और सेवा के कारण दिल्ली/एनसीआर में स्थाई या अस्थाई रूप से निवास कर रहे हैं, पर जिनकी आत्मा आज भी तराई की मिट्टी की सौंधी खुशबू से सराबोर है। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय राजधानी में गठित तराई वेलफेयर एसोसिएशन का उद्देश्य केवल सामाजिक मेल मिलाप तक सीमित नहीं है, बल्कि तराई की एकता, विकास, संस्कृति और धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाना इसका मूल संकल्प है। समय के साथ यह संस्था लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बहराइच सहित आसपास के जनपदों के सैकड़ों प्रवासी परिवारों को एक सूत्र में पिरो चुकी है। इस होली मिलन समारोह में स्नेह के रंग, संस्कृति की झलक, लोकगीतों की मिठास और आत्मीय संवादों की गर्माहट एक साथ अनुभव होगी। यहाँ रंग केवल चेहरे पर नहीं, बल्कि संबंधों में घुलेंगे; गुलाल केवल हवा में नहीं, बल्कि स्मृतियों और सपनों में उड़ेंगे। प्रवासी जीवन की भागदौड़ के बीच यह आयोजन एक ऐसी छाँव बनेगा, जहाँ लोग अपने अतीत की मिट्टी से वर्तमान का सेतु बनाएँगे और भविष्य के लिए सामूहिक संकल्प दोहराएँगे। तराई की धरती से जुड़े हर व्यक्ति के लिए यह अवसर अपनेपन की अनुभूति, सामाजिक सहयोग और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनेगा।
निस्संदेह, 7 मार्च का यह दिन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि तराई की आत्मा का उत्सर्जन होगा जहाँ रंगों के साथ रिश्तों की डोर और भी प्रगाढ़ होगी, और दिल्ली-एनसीआर की सरजमीं पर तराई की संस्कृति एक बार फिर पूरे उल्लास के साथ मुस्कुराएगी।
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