सरस्वती शिशु वाटिका में मनायी गयी महात्मा गांधी एवं संत रविदास जयंती
लखीमपुर खीरी। विद्या भारती से संबद्ध सनातन धर्म सरस्वती शिशु वाटिका में वंदना सभा के पावन वातावरण में महात्मा गांधी के शहीद दिवस एवं संत रविदास जयंती का संयुक्त आयोजन श्रद्धा, विचार और संस्कारों के भाव के साथ संपन्न हुआ। मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण नमन किया गया।
विद्यालय की संचालिका हीरा सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि 30 जनवरी का दिन शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1948 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का बलिदान हुआ था। यह दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि सत्य, अहिंसा और सद्भाव के उन आदर्शों का स्मरण है, जिन पर चलकर गांधी ने भारत को नई दिशा दी। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर देशभर में दो मिनट का मौन रखकर राष्ट्रपिता सहित सभी अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है, जिन्होंने स्वतंत्रता और राष्ट्रीय एकता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। मासांत अवकाश के कारण 31 जनवरी को शिशुओं का अवकाश होने से संत रविदास जयंती भी एक दिन पूर्व ही मनाई गई। कार्यक्रम की संयोजिका एवं शिशु भारती प्रमुख रजनी कपूर ने संत रविदास के जीवन और विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संत रविदास का जन्म माघ पूर्णिमा के दिन वाराणसी में हुआ था। समाज के हाशिये पर माने जाने वाले मोची परिवार में जन्म लेकर भी उन्होंने अपनी भक्ति, कर्म और विचारों से समता, प्रेम और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने जातिवाद और सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध निर्भीक स्वर उठाया और समाज को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य किया।
रजनी कपूर ने संत रविदास और गंगा माता से जुड़ी प्रसिद्ध कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि कहावत “मन चंगा तो कठौती में गंगा” संत रविदास की निर्मल भक्ति का प्रतीक है। कथा के अनुसार भक्त रविदास की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर गंगा माता स्वयं उनकी कठौती में प्रकट हुईं, जिससे यह संदेश मिलता है कि ईश्वर का वास शुद्ध और पवित्र मन में होता है, न कि बाह्य आडंबर में। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की समस्त शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। यह आयोजन शिशुओं के मन में राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों के बीज बोने वाला सिद्ध हुआ, जहां राष्ट्रपिता गांधी के आदर्श और संत रविदास के मानवतावादी विचार एक साथ जीवंत हो उठा।
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