🔘 खीरी में शौर्य के सम्मान से सजी पूर्व सैनिक दिवस की सुबह, बही वीरता, त्याग और कृतज्ञता की त्रिवेणी
लखीमपुर खीरी, 14 जनवरी। जब राष्ट्र की स्मृतियों में शौर्य जागता है, तब सम्मान स्वयं झुककर वीरों का अभिनंदन करता है। कुछ ऐसा ही भावपूर्ण दृश्य आज लखीमपुर खीरी में देखने को मिला, जहाँ जिला प्रशासन के तत्वावधान में “सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस” उत्साह, उल्लास और गर्वपूर्ण वातावरण में मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अमर जवान स्मारक पर हुआ, जहाँ जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले कारगिल शहीदों को पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। यह क्षण मौन था, किंतु भावनाओं से भरा जहाँ हर नमन में राष्ट्र की कृतज्ञता झलक रही थी। जिला सैनिक कल्याण पुनर्वास कार्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह, जिला सैनिक कल्याण पुनर्वास अधिकारी विंग कमांडर धनंजय प्रसाद की उपस्थिति में वीर नारी शांति रावत, ऑनररी कैप्टन संतोष सिंह (सेना मेडल) सहित दस वरिष्ठ पूर्व सैनिकों को स्मृति चिन्ह व शाल भेंट कर सम्मानित किया। यह सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उस परंपरा का था, जिसने राष्ट्र को सुरक्षित रखा है। इस अवसर पर डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा कि “पूर्व सैनिक हमारे देश की जीवित प्रेरणा हैं। उनकी सेवाओं पर पूरे राष्ट्र को गर्व है। देश के लिए सब कुछ न्योछावर करने वाले वीरों की वीरांगनाओं का समर्पण राष्ट्र की अमिट धरोहर है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।” उन्होंने सशस्त्र बलों के राष्ट्र निर्माण और सुरक्षा में अमूल्य योगदान को भावपूर्ण शब्दों में रेखांकित किया।
डीएम ने बताया कि 14 जनवरी 2017 से पूर्व सैनिक दिवस मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य सेवानिवृत्त व सेवारत सैनिकों तथा नागरिक समाज के बीच सौहार्द स्थापित करना और उन नायकों को स्मरण करना है, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से देश की सेवा की। विंग कमांडर धनंजय प्रसाद ने कहा कि इसी दिन वर्ष 1953 में भारतीय सेना के प्रथम कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा सेवानिवृत्त हुए थे। पूर्व सैनिक दिवस उनके योगदान और समस्त भूतपूर्व सैनिकों की राष्ट्र सेवा के सम्मान का प्रतीक है। यह दिवस वीर सैनिकों के परिजनों और पूर्व सैनिकों के कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करता है।
कार्यक्रम के उपरांत श्रीअन्न आधारित पोषण संदेश भी दिया गया, जहाँ कोदो की खिचड़ी, रागी का हलवा और अंकुरित मेथी का सलाद परोसा गया स्वास्थ्य, संस्कृति और सम्मान का सुंदर संगम।
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