🔘 अयोध्या महोत्सव के कवि महासंग्राम” में चमकी खीरी की कवियित्री कृति श्रीवास्तव
अयोध्या। पावन पुण्यसलिला सरयू की साक्षी, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत अयोध्याधाम की धरती पर आयोजित अयोध्या महोत्सव 2026 के अंतर्गत साहित्य का भव्य उत्सव उस समय और भी गौरवशाली हो उठा, जब “काव्य श्री प्रतियोगिता कवि महासंग्राम” का सफल एवं प्रेरणादायी आयोजन संपन्न हुआ। नवांकुर अंजलि साहित्यिक आस्था परिवार, अयोध्याधाम के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय काव्य प्रतियोगिता में देश के विभिन्न प्रांतों से आए लगभग 400 कवियों ने अपनी काव्य प्रतिभा का प्रभावी प्रदर्शन किया।
कठोर, निष्पक्ष एवं बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया के उपरांत लखीमपुर खीरी की कृति श्रीवास्तव ने अपनी सशक्त, संवेदनशील एवं विचारोत्तेजक काव्य प्रस्तुति से निर्णायकों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हुए द्वितीय स्थान प्राप्त कर जनपद व क्षेत्र को गौरवान्वित किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल मे शिवकांत मिश्र (गोंडा), कृष्ण द्विवेदी (अयोध्या), स्वयं श्रीवास्तव (उन्नाव), ज्ञान प्रकाश आकुल (लखीमपुर) एवं इंद्रजीत सिंह अवक (अमेठी) जैसे प्रतिष्ठित कवि हृदयी साहित्यकार सम्मिलित रहे, जिनके विद्वतापूर्ण, पारदर्शी और निष्पक्ष मूल्यांकन ने प्रतियोगिता की गरिमा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। इस भव्य साहित्यिक आयोजन को संस्था के संस्थापक दुर्गेश पाण्डेय ‘दुर्गम’, संगठन महासचिव अरुणधर द्विवेदी तथा अध्यक्ष हरीश श्रीवास्तव के कुशल नेतृत्व, दूरदर्शिता और साहित्यिक प्रतिबद्धता ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित बनाया।
अपनी सफलता पर भावुक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कृति श्रीवास्तव ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि आराध्य श्रीराम, माता रानी, परिवार, गुरुजनों, आयोजकों, सम्मानित निर्णायक मंडल तथा विशेष रूप से उनके पिता के अटूट विश्वास, निरंतर सहयोग और कठिन समय में दी गई प्रेरणा का सुफल है, जिन्होंने हर क्षण उन्हें संबल प्रदान किया। अयोध्या महोत्सव 2026 के इस साहित्यिक आयोजन ने न केवल नवोदित और स्थापित कवियों को सशक्त मंच दिया, बल्कि भारतीय काव्य परंपरा को नई ऊर्जा, नई चेतना और नई दिशा प्रदान करने का प्रेरणास्पद कार्य भी किया। साहित्य साधना का यह उत्सव शब्दों के माध्यम से संस्कार, संवेदना और संस्कृति को जीवंत करता रहा।
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