🔘 हुनरमंदी की उड़ान और विकसित भारत की पहचान बना ‘आकार 3.0’
लखीमपुर। शिक्षा जब कल्पना से संवाद करती है और विज्ञान सृजन से हाथ मिलाता है, तब भविष्य आकार लेता है। इसी भावभूमि पर बी. पी. एस. पब्लिक स्कूल के प्रांगण में दिनांक 25 दिसंबर 2025 को SDG 2030 और विकसित भारत 2047 के संकल्पों को साकार करती आर्ट एवं साइंस प्रदर्शनी ‘आकार 3.0’ का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया।
प्रदर्शनी का केंद्रीय विषय “हुनरमंदी” रहा, जिसने विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा, वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को मंच प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रबंधिका प्रमोदिनी शुक्ला, रत्नाकर शुक्ला एवं प्रधानाचार्या नीलम अवस्थी द्वारा भारत रत्न, महान विभूति एवं पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। यह क्षण ज्ञान, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का प्रतीक बना। प्रदर्शनी में नन्हे कदमों से बड़े सपनों की यात्रा दिखाई दी। कक्षा नर्सरी के विद्यार्थियों ने “हुनरमंदों का शहर” प्रस्तुत कर कल्पनाशील भविष्य की झलक दी। कक्षा 1 व 2 के छात्रों ने Zoo के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश दिया। वहीं कक्षा 3 से 12 तक के विद्यार्थियों ने क्रियाशील AI मॉडल, कार्यशील विज्ञान मॉडल, चार्ट और प्रयोगों के माध्यम से आधुनिक विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा एवं पर्यावरणीय चेतना को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कला अनुभाग में चित्रकला, हस्तशिल्प एवं सृजनात्मक कलाओं ने विद्यार्थियों के सौंदर्यबोध और कलात्मक हुनर को उजागर किया।
सांस्कृतिक मंच पर काव्य पाठ एवं नाट्य प्रस्तुति ने भावनाओं को स्वर दिया।
विशेष आकर्षण के रूप में “Merchant of Venice” नाटक तथा ओजपूर्ण कविता “उठो द्रौपदी, वस्त्र संभालो” का प्रभावशाली मंचन दर्शकों को भावविभोर कर गया। प्रदर्शनी के अवलोकन हेतु पहुंचे अभिभावकों एवं अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और प्रस्तुति कौशल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती अवस्थी ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाती हैं।” उन्होंने शिक्षकों, शिक्षिकाओं एवं अभिभावकों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विद्यालय की प्रबंधिका, प्रबंधक एवं प्रबंध समिति को ऐसा सशक्त शैक्षिक एवं रचनात्मक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए हृदय से धन्यवाद दिया।
कुलमिलाकर ‘आकार 3.0’ केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि हुनरमंद भारत और विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ते कदमों की सशक्त अभिव्यक्ति बनकर उभरी।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Post Comments