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बुधवार, 12 नवंबर 2025

फिरोजपुर-पट्टी रेल लिंक परियोजना को मिली हरी झंडी, पंजाब के विकास पथ पर दौड़ेगी नई रेल आशा

चंडीगढ़, 12 नवम्बर 2025। पंजाब की मिट्टी में आज उम्मीदों की नई पटरियाँ बिछ गईं! रेल मंत्रालय ने बहुप्रतीक्षित फिरोजपुर–पट्टी रेल लिंक परियोजना को मंज़ूरी दे दी है। कुल 25.72 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन प्रदेश के विकास का एक सशक्त अध्याय लिखने जा रही है।

केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस ऐतिहासिक घोषणा की जानकारी देते हुए बताया कि ₹764.19 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना केवल एक परिवहन लिंक नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और रणनीतिक परिवर्तन का सेतु है। भूमि अधिग्रहण के लिए ₹166 करोड़ की राशि रेलवे स्वयं वहन करेगा।

श्री बिट्टू ने कहा यह परियोजना पंजाब के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का ऐतिहासिक उपहार है। इससे न केवल क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और व्यापार दोनों को नई ऊर्जा मिलेगी।”



इस नई रेल लाइन के बन जाने से फिरोजपुर और अमृतसर की दूरी 196 किलोमीटर से घटकर लगभग 100 किलोमीटर रह जाएगी, जबकि जम्मू–फिरोजपुर–फाजिल्का–मुंबई कॉरिडोर की दूरी में 236 किलोमीटर की कमी आएगी। मालवा और माझा क्षेत्रों के बीच यह एक मजबूत आर्थिक धारा का निर्माण करेगी, जो लॉजिस्टिक दक्षता को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।

रेलवे ने पंजाब के मुख्य सचिव को भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश भेज दिए हैं, जिससे परियोजना पर कार्य तेजी से शुरू किया जा सके।

यह रेल लिंक जालंधर–फिरोजपुर और पट्टी खेमकरण मार्गों को जोड़ते हुए सीमा क्षेत्र के लिए एक वैकल्पिक व तेज़ संपर्क मार्ग बनेगा। इस मार्ग का रणनीतिक महत्व भी अत्यंत बड़ा है  यह सैनिकों, उपकरणों और आपूर्ति की त्वरित आवाजाही सुनिश्चित करेगा।

श्री बिट्टू ने बताया कि इस परियोजना से लगभग 10 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा और 2.5 लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित होंगे। प्रतिदिन 2,500–3,500 यात्री इस नई रेल सेवा से जुड़ेंगे  जिनमें छात्र, किसान, कर्मचारी और ग्रामीण मरीज प्रमुख रूप से लाभान्वित होंगे।

उन्होंने कहा “यह रेल लाइन केवल ट्रेनों की नहीं, तरक्की की धड़कन होगी। इससे कृषि बाजारों तक पहुँच आसान होगी, व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी, औद्योगिक निवेश को बल मिलेगा और शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र में नई संभावनाएँ जन्म लेंगी।”



इस परियोजना से अमृतसर जैसे प्रमुख धार्मिक, व्यावसायिक और शैक्षणिक केंद्र तक पहुँचना और भी सुगम हो जाएगा, जहाँ प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं।

सबसे प्रेरक तथ्य यह है कि यह नया मार्ग विभाजन के समय खोए हुए ऐतिहासिक रेल रूट को पुनर्जीवित करेगा  जिससे फिरोजपुर–खेमकरण की दूरी 294 किलोमीटर से घटकर मात्र 110 किलोमीटर रह जाएगी। यह न केवल भौगोलिक दूरी मिटाएगा, बल्कि दिलों की दूरियाँ भी कम करेगा।

इस अवसर पर डीआरएम अंबाला विनोद भाटिया, सीपीएम/निर्माण अजय वार्ष्णेय, सीपीएम/आरएलडीए बलबीर सिंह, एडीआरएम फिरोजपुर नितिन गर्ग तथा ईडीपीजी/रेल राज्यमंत्री श्री धनंजय सिंह उपस्थित रहे।

यह रेल लिंक पंजाब की धरती पर विकास की नई पटरियाँ बिछाएगा, जहाँ हर सीटी के साथ गूंजेगी प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि की धुन!

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