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मंगलवार, 9 सितंबर 2025

अहंकार पर भक्ति की विजय: दानवीर राजा मोरध्वज की प्रेरक कथा ने जीता दर्शकों का दिल

प्रयागराज उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय नौटंकी समारोह के दूसरे दिन मंगलवार को सांस्कृतिक केंद्र प्रेक्षागृह में डॉ. खेमचंद्र यदुवंशी द्वारा निर्देशित लोक विधा नौटंकी शैली पर आधारित नाटक “कृष्ण भक्त दानवीर राजा मोरध्वज” का भव्य मंचन हुआ। नाटक में राजा मोरध्वज की भक्ति, त्याग और सत्यनिष्ठा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जीवन में आने वाले कष्टों को दूर करने का मार्ग अहंकार का त्याग और ईश्वर में विश्वास है।केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने मुख्य अतिथि रामनरेश तिवारी, सदस्य हिन्दी (सलाहकार समिति, प्रयागराज) को पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। नाटक की शुरुआत महाभारत युद्ध के बाद पांडवों द्वारा अश्वमेध यज्ञ के घोड़े की रक्षा करते हुए अर्जुन द्वारा युवराज ताम्रध्वज से युद्ध करने की घटना से होती है। अर्जुन युद्ध में पराजित होकर बंदी बना लिए जाते हैं, लेकिन राजा मोरध्वज उनकी मदद कर उन्हें सम्मानपूर्वक मुक्त कर देते हैं।अर्जुन इस घटना से दुखी होकर श्रीकृष्ण से अपना दर्द साझा करते हैं। तब श्रीकृष्ण बताते हैं कि मोरध्वज उनकी परमभक्ति से सम्पन्न हैं। अर्जुन का अहंकार तोड़ने के लिए भगवान कृष्ण उन्हें साधु वेश में लेकर मोरध्वज के दरबार पहुँचते हैं। मोरध्वज बिना किसी भय या लोभ के अपने पुत्र ताम्रध्वज का बलिदान करने को तैयार हो जाते हैं। जब सब कुछ समाप्त हो जाता है, तब राजा मोरध्वज ईश्वर से सत्य धर्म की रक्षा हेतु प्रार्थना करते हैं। उनकी निष्ठा देखकर भगवान श्रीकृष्ण अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट होते हैं और ताम्रध्वज को जीवित कर देते हैं।
अंत में अर्जुन समझते हैं कि भक्ति में विनम्रता ही सबसे बड़ा बल है। नाटक का यह मार्मिक प्रस्तुतीकरण दर्शकों को गहराई से छू गया। कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय ने कथा को जीवंत बना दिया। देर तक दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट से नाटक की सराहना करते रहे।कार्यक्रम का संचालन श्वेता श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर केंद्र के समस्त अधिकारी, कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में दर्शकों ने भाग लेकर नाटक का आनंद लिया।

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