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रविवार, 7 सितंबर 2025

खीरी में समेकित शिक्षा के तहत दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष योजनाएँ और सुविधाएँ

लखीमपुर-खीरी। दिनांक 07 सितंबर 2025। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत जनपद लखीमपुर-खीरी में समेकित शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी दिव्यांग बच्चा (CWSN – Children With Special Needs) शिक्षा से वंचित न रहे और मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर बने।

🔘 दिव्यांग बच्चों के लिए चलाई जा रही विशेष योजनाएँ और कार्यक्रम निम्न हैं-

नामांकन और शिक्षा में बढ़ावा: जनपद खीरी के प्रत्येक विद्यालय में विशेष अभियान चलाकर दिव्यांग बच्चों का नामांकन कराया जा रहा है। विशेष शिक्षकों (Special Educators) द्वारा बच्चों को व्यक्तिगत सहयोग, काउंसलिंग और सहायक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उनकी उपस्थिति और सीखने की गुणवत्ता में वृद्धि हो रही है।

उपस्थिति और डिजिटल निगरानी: दिव्यांग बच्चों की नियमित उपस्थिति और प्रगति की जानकारी के लिए समर्थ पोर्टल संचालित है। इस पोर्टल पर बच्चों की पूरी शैक्षणिक स्थिति, नामांकन से लेकर योजनाओं के लाभ तक, डिजिटल रूप में दर्ज होती है।

रिसोर्स सेंटर लखीमपुर खीरी में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए 8 रिसोर्स सेंटर' चलाए जा रहे हैं। जिनमें लखीमपुर, नकहा, फूलबेहड़ कुंभी, बांकेगंज, निघासन, पालिया, और बेहजम में रिसोर्स सेंटर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। जो नियमित कक्षाओं में पढ़ने वाले लेकिन व्यक्तिगत व छोटे समूहों में विशेष निर्देश की आवश्यकता वाले छात्रों को सहायता प्रदान करता है। यह केंद्र विशेष शिक्षा कार्यक्रम, उपचारात्मक व प्रतिपूरक निर्देश, अनुकूल शैक्षणिक वातावरण और दैनिक जीवन की गतिविधियों को सीखने में मदद प्रदान करता है, ताकि विशेष आवश्यकता वाले बच्चे आत्मविश्वास के साथ शिक्षा पूरी कर सकें और समाज में योगदान दे सकें। रिसोर्ट सेंटर में बच्चों की थेरेपी व अभिभावकों की काउंसलिंग आदि विशेष रूप से की जाती है।

*उपकरण वितरण: अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगता (दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित, चलने-फिरने में असमर्थ आदि) के अनुसार ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, श्रवण यंत्र, ब्रेल किट, कृत्रिम अंग, विशेष चश्मा आदि उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उपकरण वितरण हेतु समय-समय पर उपकरण वितरण मेले आयोजित किए जाते हैं।

*विशेष दिवस और सांस्कृतिक गतिविधियाँ: प्रत्येक वर्ष विश्व दिव्यांग दिवस 03 दिसंबर पर जनपद में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस अवसर पर बच्चों को विभिन्न उपकरण प्रदान किए जाते हैं और उन्हें सांस्कृतिक व खेलकूद गतिविधियों में प्रतिभाग का अवसर दिया जाता है, जिससे उनका आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता बढ़ती है।

*संस्थागत सहयोग और प्रयास दिव्यांग बच्चों के लिए उपकरण वितरण में मुख्य रूप से एलिम्को (ALIMCO - Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India) नामक भारत सरकार का एक उपक्रम सहयोग करता है। यह कंपनी जनपद में सहायक उपकरणों के वितरण शिविरों का आयोजन करने में बेसिक शिक्षा विभाग का सहयोग  करती है, जिसमें ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर और अन्य आवश्यक उपकरण शामिल हैं। एलिम्को, बेसिक शिक्षा विभाग के साथ मिलकर काम करता है। यह कंपनी विभिन्न जिलों में दिव्यांग बच्चों के लिए नि:शुल्क सहायक उपकरण वितरण शिविरों का आयोजन करती है। उपकरणों के चयन में एलिम्को के विशेषज्ञ बच्चों की आवश्यकताओं का आकलन करते हैं। ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर, सीपी चेयर, श्रवण यंत्र, ब्रेल किट, टीएलएम किट, कैलिपर आदि।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि जिला समन्वयक समेकित शिक्षा, माला श्रीवास्तव इस दिशा में विशेष प्रयास कर रही हैं। उनके मार्गदर्शन में जनपद के सभी ब्लॉकों में विशेष शिक्षक  दिव्यांग बच्चों के घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक करते हैं और विद्यालय से जोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।इन प्रयासों से लखीमपुर-खीरी में दिव्यांग बच्चों को शिक्षा में समान अवसर मिल रहे हैं। बच्चों की सीखने की गति में सुधार हुआ है। आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास विकसित हो रहा है। विशेष किट और उपकरणों की उपलब्धता से शिक्षा ग्रहण करना आसान हुआ है। मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़कर वे सांस्कृतिक, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी लखीमपुर-खीरी श्री प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि “जनपद लखीमपुर-खीरी में समावेशी शिक्षा के तहत दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। PFMS, समर्थ, और अन्य पोर्टलों के माध्यम से योजनाओं का लाभ समय पर बच्चों तक पहुँच रहा है। उपकरण वितरण में  एलिम्को का विशेष सहयोग मिल रहा है। साथ ही, समेकित शिक्षा की जिला समन्वयक श्रीमती माला श्रीवास्तव के प्रयासों से अभिभावकों में जागरूकता आई है और बच्चों की शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा है। हमारा लक्ष्य है कि जनपद का कोई भी दिव्यांग बच्चा शिक्षा और योजनाओं से वंचित न रहे और वह एक आत्मनिर्भर नागरिक बन सके।

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