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मंगलवार, 5 अगस्त 2025

पुस्तक-समीक्षा : संवेदना के विविध आयामों का साक्षात्कार कराती हैं अंजलि श्रीवास्तव की कहानियाँ


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पुस्तक का नाम : तस्वीर (कहानी संग्रह)
लेखिका : अंजलि श्रीवास्तव
पुस्तक प्रकार : हार्ड बाउंड/ पेपर बैक
प्रकाशक : नवलेख प्रकाशन (इमेज प्रकाशन समूह)
मूल्य : 300 रुपए
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       संगमनगरी प्रयागराज की कहानीकार एवं कवयित्री अंजलि श्रीवास्तव साहित्य-सृजन के क्षेत्र में एक सौम्य-साधक की भाँति मनोयोगपूर्वक अपना योगदान दे रही हैं। विगत वर्षों में प्रकाशन और प्रसारण के विभिन्न पटलों पर गद्य-पद्य की उनकी रचनाएँ अपनी छाप छोड़ती रही हैं। उनकी पहली पुस्तक 'यहीं एक दरख़्त था' काव्य-संग्रह के रूप में पाठकों से रूबरू हुईं। गत दिनों उनका प्रथम कहानी संग्रह 'तस्वीर' प्रकाशित हुआ। यह कहानी संग्रह अपनी उत्कृष्ट कहानियों के माध्यम से पाठकों के ज़ेहन को दस्तक दे रहा है।
        'तस्वीर' कहानी संग्रह सही मायनों में मानवीय संवदेनाओं का भावप्रवण प्रतिबिम्ब है। यह प्रतिबिम्ब, जो संगमनगरी प्रयागराज की भावोत्प्रेरक लेखिका अंजलि श्रीवास्तव के नेत्रों से संवेदना के विविध आयामों का साक्षात्कार लेकर स्वतः निसृत हुआ है। कहानियों के रूप में संवेदनाओं के वे प्रतिबिम्ब वर्तमान के आत्मकेंद्रित वातावरण से कुछ इतर सोचने और स्वीकारने के निमित्त प्रेरित करते हैं।     
           कहानियों की विषय-वस्तु और प्रस्तुति लेखिका के सहज और सार्थक लेखन की ज्ञापक है। कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते आँखों का नम होना, कुछ अपने आसपास को उससे संपृक्त करते हुए रो लेने की हूक उठना, कहानियों की उत्कृष्टता का द्योतक है।
     कहानी-संग्रह की आमुख कथा 'तस्वीर' वयवृद्धजनों से जुड़ा मार्मिक प्रसंग है। जिसमें एक वृद्धा बाढ़ के पानी में अपने जीवनसाथी की तस्वीर के बाद जाने से विचलित और व्यथित है। वह तमाम जतन करके तस्वीर पाने का प्रयास करती है। परिजनों के होने के बावजूद उसके अकेले का संघर्ष कहानी के हर वाक्य में अभिव्यक्त होता है। कहानी आदि से अंत तक घनीभूत संवेदना के साथ मर्म को स्पर्श करती है। इसी तरह अन्य कहानियाँ भी दैनन्दिन के जीवन-संदर्भों से जुड़ कर भाव और संवेदना की तस्वीर उकेरते हैं। स्नेह, प्रेम, उदारता, वात्सल्य और संवेदना के भाव जो आवरण पृष्ठ की छवि से उपजते हैं, वे अन्तरपृष्ठों की अट्ठाइस कहानियों में पूरी गहनता और समग्रता से अभिव्यक्त होते हैं। आवरण कथा मर्म को जिस तरह स्पर्श करती है, उसी तरह आगे की कहानियाँ भावोद्दीपन के चरमोत्कर्ष को छूती चली जाती हैं। कहानी संग्रह की अन्तिम पंक्तियाँ पूर्ण करते-करते संग्रह की पिछली कहानियों का फ्लैशबैक लम्बे समय तक एकांतिक क्षणों का हिस्सा बना रहता है।
       कहानी संग्रह के आवरण पृष्ठ पर अवस्थित लेखिका के भावपूर्ण चित्र से पुस्तक की विषय-वस्तु के प्रति जिज्ञासा जागती है। कहानी संग्रह में व्यक्त सम्वेदनाओं का प्रवाह तीर्थराज अवस्थित संगम की अदृश्य सरस्वती की भाँति है, जिसका शुभ-आचमन कहानी संग्रह के अवगाहन से सम्बद्ध सुधी पाठक ही कर सकता है। 
         कहानी संग्रह की भूमिका राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित रचनाधर्मी यदुनाथ सिंह मुरारी ने लिखी है। इमेज प्रकाशन समूह के नवलेख प्रकाशन ने इसे प्रकाशित किया है। कहानी संग्रह के माध्यम से उत्कृष्ट सृजन के लिए सुधी लेखिका अंजलि श्रीवास्तव बधाई और साधुवाद की सुपात्र हैं। निश्चय ही ये कहानियाँ सार्वकालिक, सार्वभौमिक और सुग्राह्य होने के साथ ही पाठक के चेतन-अवचेतन मन का हिस्सा बनेंगी। प्रखर मेधासम्पन्न लेखिका की सृजन-यात्रा भाव, शब्द और अनुभूतियों की त्रिवेणी में पाठकों को आप्लावित करेगी। यह आश्वस्ति संग्रह की कहानियाँ कराती हैं।
                      -पंखुड़ी सिंह

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