नई दिल्ली भारत ने आज अपने 79वें स्वतंत्रता दिवस का आयोजन धूमधाम और उत्साह के साथ किया। लाल किले से 12वीं बार राष्ट्र के नाम संबोधन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भरता को विकास की नींव बताते हुए कई अहम योजनाओं और सुधारों की घोषणा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देश वासियों को राष्ट्र को संबोधित करते हुए, निम्न बिंदुओं पर संबोधित किया.प्रधानमंत्री ने मई के माह में जम्मू-कश्मीर के पाहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई—‘ऑपरेशन सिंदूर’—की सराहना करते हुए इसमें शामिल हमारे वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह अभियान, भारतीय सुरक्षा बलों की सटीकता और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का प्रतीक है।मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की संकल्पना को एक विकसित राष्ट्र की आधारशिला बताया। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों, जैसे कि अमेरिका द्वारा संभावित 50% सीमा शुल्क की चेतावनी के बीच, परदेशी निर्भरता के खतरों की ओर आगाह करते हुए घरेलू उद्योगों को मजबूत बनाने पर ज़ोर दिया।भविष्य की दिशा निर्धारित करते हुए, प्रधानमंत्री ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की रूपरेखा साझा की और स्वतंत्रता सेनानियों एवं देशवासियों से प्रेरणा लेकर इसे साकार करने का आह्वान किया।भाषण के दौरान अगली पीढ़ी GST सुधारों की भी घोषणा की गई, जो दिवाली तक लागू होने का लक्ष्य है। यह सुधार रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं पर करों में कटौती लाकर आम नागरिकों की जेब पर बोझ कम करेंगे।प्रधानमंत्री ने ‘पीएम विकसित भारत रोजगार योजना’ नाम से 1 लाख करोड़ रुपये के महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रम की घोषणा की, जिसका उद्देश्य युवाओं में क्षमता, कौशल और ऊद्यमशीलता को प्रोत्साहित कर रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से यह संदेश दिया कि देश में “एक देश-एक संविधान” की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाने के निर्णय का उल्लेख करते हुए, यह राष्ट्रीय एकता और संविधानिक मूल्यों की पुन: पुष्टि थी। उनका स्पष्ट संदेश था कि भारत अब आतंकवाद और परमाणु ब्लैकमेल को बिल्कुल अस्वीकार करेगा। उन्होंने भारत द्वारा ‘इंडस वॉटर ट्रीटी’ को निलंबित करने की भी घोषणा की—इस कदम ने एक साहसिक कूटनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाया प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अब “रक्त और जल साथ नहीं बहेंगे यह बयान सीमा पार जल विवादों और विवादास्पद समझौतों के प्रति भारत की दृष्टि स्पष्ट करता है। आगे उन्होंने देश की युद्ध क्षमता, ऊर्जा, और महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया—यह “आत्मनिर्भर भारत” के तहत हासिल की जा रही प्रगति का प्रतीक था। प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में भारत की महत्त्वाकांक्षा की ओर संकेत देते हुए देश में अपने खुद के स्पेस स्टेशन की स्थापना की योजना साझा की। यह घोषणा तकनीकी स्वावलंबन और महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करती है। भाषण से पहले प्रधानमंत्री ने "हर घर तिरंगा" अभियान (13–15 अगस्त) की शुरुआत की, जिसमें नागरिकों से आग्रह किया गया कि वे अपने घरों पर तिरंगा फहराकर सेना के बलिदान और साहस का सम्मान करें। इस विशेष पहल ने एकता की भावना को और गहरा किया।
साथ ही, उन्होंने भाषण की तैयारी में जन-भागीदारी बढ़ाने की दिशा में 12 अगस्त तक MyGov पोर्टल और NaMo ऐप पर सुझाव आमंत्रित किये थे—यह लोकतांत्रिक संवाद और नीति निर्माण में आम जनता की सक्रिय भागीदारी का प्रतीक था।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में भारत में आए प्राकृतिक आपदाओं—जैसे भूस्खलन और बादल फटने—में प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की, और राहत एवं पुनर्वास के लिए राज्य और केंद्रीय सरकारों की सक्रियता पर प्रकाश डाला।
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