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शुक्रवार, 12 अप्रैल 2024

चित्रकूट में होगा हवा में चलने का अहसास : धनुष बाण के आकार वाला यूपी का पहला ग्लास स्काई वाक ब्रिज बनकर तैयार

चित्रकूट।आपने बिहार के राजगीर में बना कांच ब्रिज की कई तस्वीरें तो देखी ही होंगी।अब प्रभु श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट में उत्तर प्रदेश का पहला कांच का धनुष‌ और बाण के आकार का ब्रिज लगभग बनकर तैयार है।तुलसी(शबरी)जल प्रपात पर बने कांच के इस ब्रिज पर पर्यटकों को हवा में चलने का अहसास तो होगा।साथ ही पर्यटक झरने की कल-कल की आवाज भी सुन सकेंगे।पौने चार करोड़ की लागत से स्काई वाक ब्रिज का उद्घाटन लोकसभा चुनाव के बाद होने की संभावना है।बता दें कि कभी डकैतों के लिए मशहूर रहे पाठा के जंगल अब पर्यटकों को लुभा रहे हैं। रानीपुर टाइगर रिजर्व क्षेत्र के तुलसी (शबरी) जल प्रपात पर कांच का स्काई वाक ब्रिज बनाया गया है।धनुष और बाण की आकार में बने इस स्काई ब्रिज से पर्यटकों की बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।स्काई वाक ब्रिज तैयार होने में लगभग डेढ़ साल का समय लगा है। धनुष और बाण के आकार में बने ब्रिज में खाई की ओर बाण की लंबाई 30 मीटर है। 12 मीटर तक वुडेन टाइल्स फिर आगे 36 एमएम मोटा टफन ग्लास लगा है। दोनों पिलर के बीच धनुष की चौड़ाई 35 मीटर है। पुल की भार क्षमता प्रति वर्ग मीटर में 500 किलो है। एक बार में 25 यात्री पुल पर आ जा सकेंगे। वन व पर्यटन विभाग ने 3.71 करोड़ रुपये की लागत से ब्रिज का निर्माण कराया है। इस पुल का निर्माण बिहार के राजगीर में स्काई वाक ब्रिज की तर्ज पर किया गया है।रानीपुर टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक एनपी सिंह और पर्यटन अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव का कहना है कि यह स्थान ईको टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनेगा। ईको टूरिज्म का मुख्य केंद्र बनाने के लिए यहां रॉक और हर्बल गार्डन के साथ रेस्टोरेंट भी बनाए जाएंगे। ब्रिज का निर्माण वन और पर्यटन विभाग की ओर से कराया गया है।ब्रिज पर टहलने के लिए टिकट लेना होगा। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। ब्रिज पर आने और जाने का अलग-अलग मार्ग होगा। ब्रिज के पास जानवरों की आकृति वाली घास का गार्डन, फव्वारा, टॉयलेट आदि का निर्माण किया जा रहा है। सुरक्षा के लिए चेनलिंक वायर भी ब्रिज के पास लगाया जा रहा है।

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