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गुरुवार, 21 मार्च 2024

खीरी जनपद में होली पूर्व शुरू हुई हेपेटाइटिस बी के रोगियों की डायलिसिस

● खीरी जनपद में शुरू हुई हेपेटाइटिस बी के रोगियों की डायलिसिस

● जनपद के आसपास के हेपेटाइटिस बी के मरीज भी अब करवा सकेंगे निःशुल्क डायलिसिस

लखीमपुर। उत्तर प्रदेश के खीरी जनपद में लगातार स्वास्थ्य सेवाएं पहले से बेहतर होती जा रही हैं। इसी क्रम में पीपीपी मॉडल पर संचालित लखीमपुर के डायलिसिस सेंटर में 03 डायलिसिस मशीनें बढ़ाकर डायलिसिस संस्था ने गुर्दा फेल रोगियों की डायलिसिस आसान कर दी है। अब यहां हेपेटाइटिस 'बी' से संक्रमित डायलिसिस रोगियों की डायलिसिस भी महज एक रुपये के सरकारी पर्चे पर हो जाया करेगी।

उल्लेखनीय है कि हेपेटाइटिस बी के डायलिसिस मरीजों को खीरी व आसपास के जनपदों में डायलिसिस मशीन न होने से राजधानी लखनऊ या अन्य विकसित बड़े शहरों की तरफ रुख करना पड़ता था जिससे गुर्दा फेल्योर गम्भीर रोगियों को आर्थिक, मानसिक व शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। खीरी जनपद में बढ़ते डायलिसिस मरीजों एवं हेपेटाइटिस बी के डायलिसिस मरीजों की वेदना पढ़ते हुए डायलिसिस संस्था डीसीडीसी किडनी केयर ने लखीमपुर डायलिसिस सेंटर पर राग, फाग, अनुराग के महापर्व होली से पूर्व तीन निफ्रो मशीन स्थापित कर दी हैं, जिनमे से एक हेपेटाइटिस बी के लिए सुरक्षित की है। इस मशीन से खीरी ही नही वरन आसपास के जनपदों के मरीज भी लाभान्वित होंगे। बताते चलें कि 11 मार्च 2022 में मात्र 05 डायलिसिस मशीनों के साथ शुरू हुए इस सेंटर में मौजूदा समय मे लगभग 13 डायलिसिस मशीनें हो चुकी हैं जिसमे से एक डायलिसिस मशीन हेपेटाइटिस बी व एक डायलिसिस मशीन हेपेटाइटिस सी के लिए आइसोलेशन कक्ष में सुरक्षित की गई है।

धीरे धीरे लीवर पर हमला करता है हेपेटाइटिस बी

हेपेटाइटिस बी एक जानलेवा वायरस है जो लीवर को धीरे धीरे डैमेज कर देता है। यह किसी प्रकार संक्रमित रक्त के संपर्क में आने से फैलता है। चिकित्सकों के मुताबिक हेपेटाइटिस बी का वायरस संक्रमित रक्त में ज्यादा देर तक असरदार रहता है। यह छूने, चूमने या सांस लेने से नही फैलता। खासतौर पर यह तब ज्यादा चिंतनीय हो जाता है जब गुर्दा फेल्योर रोगी इससे संक्रमित होता है। डायलिसिस में प्रक्रिया के दौरान पूरे 04 घण्टे रक्त मशीनों में निर्विध्न चलता रहता है, इसलिए इसके संक्रमित मरीज को अलग आइसोलेशन कक्ष में अलग डायलिसिस मशीन पर ही डायलिसिस दी जाती है ताकि वायरल निगेटिव डायलिसिस मरीज संक्रमण से सुरक्षित रहे।

हेपेटाइटिस बी डायलिसिस मशीन लगने पर नगर के सेवियों ने संस्था को दिया साधुवाद

खीरी जनपद में पीपीपी मॉडल पर संचालित लखीमपुर डायलिसिस सेंटर में हेपेटाइटिस बी की डायलिसिस मशीन लगने पर नगर के सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों ने डायलिसिस संस्था डीसीडीसी किडनी केयर का आभार व्यक्त किया है।
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष डॉ0 इरा श्रीवास्तव ने कहा कि बड़े गौरव का विषय है कि नगर में हेपेटाइटिस बी की डायलिसिस मशीन लग गयी है इससे जनपद के गुर्दा फेल्योर गम्भीर हेपेटाइटिस बी पोजटिव मरीजों को बड़े व विकसित शहरों की तरफ रुख नही करना पड़ेगा साथ ही आसपास के जिलों के रोगी भी लाभान्वित होंगे। उन्होंने डायलिसिस संस्था का आभार व्यक्त किया। 
भारत विकास परिषद लखीमपुर शाखा के अध्यक्ष डॉ0 राजवीर सिंह ने कहा कि डायलिसिस अपने आप मे एक जटिल प्रक्रिया है ऊपर से हेपेटाइटिस बी जैसा संक्रमण फिर लखनऊ, बरेली, दिल्ली जैसे शहरों में जाकर स्वयं को स्थिर रखना एक गम्भीर चुनौती था। संस्था इस नेक कार्य के लिए बधाई की पात्र है। जेसीआई अध्यक्ष कुमार उत्कर्ष ने कहा कि वाकई डायलिसिस संस्था ने यह सुविधा देकर खीरी जनपद की स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारत विकास परिषद संस्कृति शाखा लखीमपुर खीरी अध्यक्ष एड0 आर्येन्द्र पाल सिंह ने कहा कि खीरी जनपद में हेपेटाइटिस बी की डायलिसिस वो भी मुफ्त हेपेटाइटिस बी डायलिसिस मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नही, साधुवाद है डायलिसिस संस्था को। श्री चित्रगुप्त कायस्थ सभा अध्यक्ष एवं विओम फाउंडेशन के संस्थापक डॉ0 ओ0 पी0 श्रीवास्तव ने मरीजों की वेदना का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे बड़े शहरों में धक्के खाने पड़ते थे, उन्होंने संस्था का आभार व्यक्त किया। सामाजिक सरोकारों से जुड़े साहित्यधर्मी राम मोहन गुप्त 'अमर' ने कहा संस्था एवं स्वास्थ्य विभाग दोनों जहाँ एक ओर बधाई के पात्र हैं वही सेंटर की टीम प्रशंसा की। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा जिलाध्यक्ष नीरज सक्सेना ने कहा कि वाकई खीरी जनपद लगातार विकास के पद पर अग्रसर है। जेसीआई संकल्प की अध्यक्ष रुपाली शुक्ला ने कहा कि डायलिसिस संस्था एवं जिला स्वास्थ्य विभाग दोनों ही बधाई के पात्र हैं इस सुविधा के लिए। इसके अलावा तमाम समाजसेवियों ने इसे बेहतरीन कदम बताया है।

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