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मंगलवार, 18 अप्रैल 2023

खुलासा / बड़ा माफिया बनने अतीक-अशरफ को उतारा मौत के घाट, पूछताछ में बोले हत्यारे read more

                          ( एल एन सिंह )
अतीक अहमद-अशरफ मर्डर केस में हमलावरों को जिसने उपलब्ध कराया था आधुनिक हथियार उसके नाम का हुआ खुलासा

प्रयागराज: अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। ये खुलासा अतीक और उसके भाई पर गोलियां बरसाने वाले तीनों हमलावरों ने पूछताछ में किया है। हमलावरों ने पूछताछ में बताया कि कानपुर के हिस्ट्रीशीटर बाबर ने उन्हें आधुनिक बंदूकें दी थीं। पूछताछ में तीनों शूटर सनी, अरूण और लवलेश ने ये खुलासा किया है। सनी की बाबर से हमीरपुर जेल में मुलाकात हुई थी। बाबर पंजाब के अपराधियों से संबध रखता है। अतीक अहमद और अशरफ की हत्या करने वाले शूटर्स ने पुलिस की पूछताछ में बताया है कि बाबर ने ही शूटर्स को असलहा उपलब्ध कराए थे। बाबर हाल ही में जेल से जमानत पर छूट कर आया है। बाबर का अतीक की हत्या में कितना हाथ है, क्या उसने ही इस साजिश को रचा था, फिलहाल इस मामले पर कोई खास जानकारी नहीं मिल पाई है।

कौन है कानपुर का शातिर अपराधी बाबर?

अतीक के हत्यारों को असलहा मुहैया कराने वाला बाबर कानपुर का शातिर अपराधी है। उसके ऊपर यहां पांच मुकदमें दर्ज हैं. उसकी क्राइम कुंडली को देखते हुए पुलिस ने उस पर इनाम भी घोषित किया है। एटीएस ने 2013 में विदेशी असलहे के साथ बाबर को गिरफ्तार किया था। इस मामले बाबर जेल की सजा भी काट चुकी है। इसके साथ ही उसका पंजाब के कुछ अपराधियों से भी कनेक्शन सामने आया है।

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की शनिवार की रात को तीन आरोपियों अरुण मौर्य, सनी और लवलेश तिवारी ने उस वक्त हत्या कर दी थी जब उन्हें मेडिकल चेकअप के लिए लाया गया था। हत्यारों ने मीडिया के कैमरों के सामने दोनों के सिर में गोली मारी, जिसके बाद वो नीचे गिर पड़े, इसके बाद तीनों ने उनपर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस घटना से पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है।पुलिस कस्टडी में अतीक और अशरफ की हुई मौत के बाद इस पर सियासत भी जमकर हो रही है। तमाम विरोध दल इस हत्याकांड को लेकर यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

अतीक-अशरफ को लगा मौत उनके करीब है:20 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया- मेरी जान को खतरा, अशरफ को मिली धमकी सच साबित हुई

प्रयागराज इनकी नीयत ठीक नहीं है। ये परेशान करना चाहते हैं मुझे मारना चाहते हैं। अपनी हत्या से 21 दिन पहले अतीक ने यह बात मीडिया से कही थी। जब उसे साबरमती जेल से प्रयागराज लाया जा रहा था। उस वक्त अतीक को एनकाउंटर का डर था। मौत का यही खौफ अशरफ को भी 29 मार्च को था। उसने कहा था- एक अधिकारी ने मुझसे कहा है कि जेल से बाहर निकालकर तुम्हें मार दिया जाएगा। आखिर में उन दोनों का डर सच साबित हुआ।

माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ की शनिवार को हत्या कर दी गई। बीते 20 दिनों में 3 बार उन्होंने हत्या की आशंका जताई। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था, जब अतीक ने पुलिस पर दबाव बनाने के लिए खुद पर ही बम से हमला करवाया था। आइए अतीक के डर और उसके खुद पर हमला करवाने की पूरी कहानी जानते हैं। शुरुआत उन 3 घटनाओं से, जो साबित करती हैं कि हत्या से पहले ही दोनों भाइयों को उनकी मौत का खौफ था।


घटना-1: अतीक ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था- मेरी जान को खतरा…मुझे यूपी न भेजा जाए

● 27 मार्च की है, जब अतीक को साबरमती जेल से प्रयागराज लाया जा रहा था।

28 मार्च का दिन था। अतीक अहमद की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को एक अर्जी मिली। इसमें लिख था, मुझे यूपी में दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए गुजरात से बाहर ना भेजा जाए। मुझे वहां सुरक्षा और जान को खतरा है। यूपी सरकार के कुछ मंत्रियों के बयान से मुझे ऐसा लगता है कि मेरा फर्जी एनकाउंटर किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने तब अतीक की याचिका सुनने से मना कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जब उसे गुजरात से यूपी लाया जा चुका है, तो अब सुनवाई का कोई मामला नहीं बचता। सुरक्षा या किसी भी और बात के लिए उसे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करनी चाहिए।

27 मार्च को अतीक साबरमती जेल से प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल लाया गया था। इसके एक दिन बाद उसे उमेश पाल किडनैपिंग केस में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। सजा मिलने के बाद उसे वापस साबरमती जेल भेज दिया गया था।

घटना- 2: पेशी के बाद अशरफ बोला था- 2 हफ्ते बाद किसी बहाने से निकाला जाऊंगा, निपटा दिया जाऊंगा

प्रयागराज की MP-MLA कोर्ट में पेशी के बाद बरेली सेंट्रल जेल लाया जाता अशरफ

जेल में बंद होते हुए भी अशरफ खुश था। वजह थी उमेश पाल किडनैपिंग मामले में उसका बरी होना। लेकिन निर्दोष साबित होते हुए भी अशरफ को खुद की हत्या का डर सता रहा था। इसलिए प्रयागराज से वापस बरेली जेल आते हुए उसने 29 मार्च को मीडिया के सामने एक चौंकाने वाला बयान दिया।

अशरफ ने कहा, मुझे एक अधिकारी ने धमकी दी है। उसने कहा है कि मुझे 2 हफ्ते के बाद किसी बहाने से निकाला जाएगा और निपटा दिया जाएगा। मुझ पर लगे आरोप फर्जी हैं। यह मुझे, मेरे परिवार को और UP सरकार को बदनाम करने की साजिश है।

अगर मेरी हत्या होती है तो सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मेरा सील बंद लिफाफा मिलेगा। उसमें उस अधिकारी का नाम होगा, जिसने मेरी हत्या की धमकी दी है। अशरफ ने जो बात कही थी, 15 अप्रैल की रात हू-ब-हू वो सच साबित हुई।

घटना- 3: ‘ये परेशान करना चाहते हैं, मुझे मारना चाहते हैं’


घटना- 3: ‘ये परेशान करना चाहते हैं, मुझे मारना चाहते हैं’

प्रिजन वैन के अंदर बैठा अतीक मीडिया से बात करता हुआ।

अतीक को उम्रकैद मिले 13 दिन बीत गए थे। 11 अप्रैल को यूपी पुलिस उमेश पाल हत्याकांड में पूछताछ के लिए फिर उसे लेने साबरमती जेल पहुंची। जेल में पुलिस के आने की खबर जब माफिया को लगी, तो उसकी हड़बड़ाहट बढ़ गई। अतीक का काफिला एक बार फिर प्रयागराज के लिए चल पड़ा।

इस बार एक नई बात हुई। जहां गाड़ी रुकती, अतीक मीडिया से बात करता। इस बीच उससे सवाल पूछा गया- आप फिर से प्रयागराज लाए जा रहे हैं। क्या कहना है आपका? इस पर अतीक ने जवाब दिया- ये मुझे फिर ले जा रहे हैं। इनकी नीयत ठीक नहीं है। ये परेशान करना चाहते हैं, मुझे मारना चाहते हैं।

प्रयागराज आते-आते अतीक ने मीडिया को भी धन्यवाद दिया। उसने अपने काफिले के साथ चल रहे पत्रकारों को कहा- आप सभी का शुक्रिया। आप लोगों की वजह से मेरी हिफाजत हुई है, मीडिया वालों ने मुझे बचा लिया।

जब मौत आई तो हिलने का मौका नहीं मिला

15 अप्रैल की रात 10:30 बजे अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

अतीक और अशरफ से पूछताछ का ये तीसरा दिन था।

पुलिस के साथ-साथ ATS हथियार तस्करी को लेकर दोनों से पूछताछ कर रही थी। शाम तक सवाल-जवाब होते रहे। फिर रात लगभग 10 बजे दोनों को रूटीन मेडिकल चेकअप के लिए कॉल्विन अस्पताल ले जाया गया।

दोनों एक बार फिर लॉकअप से बाहर आए थे। इसी मौके को देख मीडिया ने अतीक को घेर लिया। अतीक से सवाल पूछा गया- आप बेटे के जनाजे में नहीं गए? अतीक बोला- नहीं ले गए तो नहीं गए। अतीक सिर्फ यही बोल पाया था कि 3 सेकेंड बाद शूटरों ने उसके सिर पर गोली मार दी। वह जमीन पर गिर गया। इसके बाद अशरफ पर फायरिंग की गई। दोनों वहीं पर ढेर हो गए।

यहां तक आपने अतीक-अशरफ के डर की घटनाओं के बारे में जाना। आगे वो किस्सा भी पढ़िए, जब अतीक ने पुलिस पर दबाव बनाने के लिए खुद पर बम फेंकवाया था


जब ये घटना हुई उस समय अतीक अहमद सरेंडर कर नैनी सेंट्रल जेल में था।

साल 2002 की बात है। अतीक ने खुद पर हमले की एक साजिश रची। इरादा था उसकी जांच कर रहे पुलिस अधिकारी को फंसाना। माफिया ने उस वक्त जो प्लानिंग की थी। अब वह वैसे ही एक हमले में मारा गया।

खुद पर बम फेंकवाया, ताकि पुलिस पर सवाल उठे

तारीख थी 7 अगस्त, 2002पुलिस कस्टडी के बीच अतीक को कचहरी में पेशी के लिए लाया गया। वह रास्ते में ही था कि अचानक उस पर बम फेंक दिया गया। वो एक पटाखा बम (बगैर छर्रे वाला सिर्फ आवाज करने वाला बम) था। अतीक जमीन पर गिरा और उसके चेहरे पर मामूली खरोंचें आईं।

अतीक को अस्पताल में भर्ती कराया गया। थोड़ा ठीक होने पर उसने उस वक्त के SP सिटी लालजी शुक्ला पर बम से हमला कराने का आरोप लगाया। लालजी तब अतीक के खिलाफ चल रही इन्वेस्टिगेशन को लीड कर रहे थे।

लालजी कहते हैं, हमने इस मामले में अतीक के शूटर अखलाक को गिरफ्तार किया था। अखलाक ने मजिस्ट्रेट के सामने कबूला था कि पिता और भाई की मदद से अतीक ने खुद पर हमला कराया है। इस हमले की 2 वजह थीं। पहली: उसके खिलाफ चल रही इन्वेस्टिगेशन रोक दी जाए। दूसरी: मुझे इस झूठे केस में फंसा दिया जाए।

अतीक और अशरफ अब कसारी-मसारी के कब्रिस्तान में दफ्न हैं। सुपुर्द-ए-खाक हो चुके हैं। लेकिन अतीक के कुनबे की बिखरने की असली शुरुआत 7 साल पहले ही हो गई थी।

7 साल में अतीक माफिया से मुजरिम बन गया

2017 के विधानसभा चुनाव में जब महज चार महीने बचे थे तब उस वक्त के सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अतीक अहमद को कानपुर कैंट से प्रत्याशी घोषित कर दिया। टिकट मिलने की खुशी में अतीक अहमद ने 22 दिसंबर 2016 को शक्ति प्रदर्शन किया। शक्ति प्रदर्शन भी ऐसा कि पूरे देश की मीडिया का ध्यान इधर खिंचा चला गया। अतीक करीब 500 गाड़ियों के काफिले के साथ कानपुर में एंट्री किया। जिधर से गुजरा उधर जाम लगता चला गया। खुद 5 करोड़ की ‘हमर’ कार पर सवार था।

दिसंबर 2016 में कानपुर में 500 गाड़ियों के साथ चलता अतीक का काफिला।

500 गाड़ियों के साथ निकलने का यह पहला काफिला नहीं था। इसके पहले 2014 में श्रावस्ती से लोकसभा प्रत्याशी बनाए जाने पर भी अतीक ने ऐसे ही काफिले के साथ वहां एंट्री की थी। 2018 में फूलपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुआ तब भी अतीक अहमद ने जेल बंद रहते हुए चुनाव लड़ा। हालांकि, दोनों जगह पर चुनाव में जीत नहीं मिली थी। लेकिन वह लोगों को अपनी शक्ति दिखा चुका था।

साल 2018 में उमेश पाल ने अतीक और उसकी गैंग पर एक के बाद एक 4 FIR दर्ज करवाईं। अतीक उस वक्त देवरिया जेल में कैद था। लगातार दर्ज हो रहे मुकदमों से बौखलाए अतीक ने जेल से ही उमेश को धमकी दी थी – मुझे सजा करवाना चाहता है। जिस दिन मरवाउंगा 15 दिनों तक नेशनल टीवी पर खबरें चलेंगी। अतीक की ये धमकी 24 फरवरी 2023 को हकीकत बन गई। इसके बाद अतीक के साथ क्या-क्या हुआ। ये आप अच्छी तरह से जानते हैं।

अतीक से जुड़ी और
बेटे की कब्र से 3KM दूर हुई हत्या, गोली लगने के 3 सेकेंड पहले असद से जुड़े सवाल पर बोला अतीक

असद के जनाजे से लेकर अतीक की हत्या के बीच गुजरे 12 घंटे किसी इत्तेफाक से कम नहीं थे। अतीक जीते-जी अपने बेटे को दफन होते भले ही न देख पाया हो, लेकिन मरते-मरते उसकी जुबान पर बेटे का ही जिक्र आया। इन 12 घंटों के बीच क्या-क्या हुआ? कैसे 15 अप्रैल की तारीख अतीक और उसके कुनबे के लिए काला दिन बन गई?

मेडिकल टेस्ट के लिए ले जाते वक्त सिर में गोली मारी; तीन हमलावरों ने सरेंडर किया

माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ की शनिवार रात प्रयागराज में हत्या कर दी गई है। पुलिस उन्हें अस्पताल में मेडिकल टेस्ट के लिए ले जा रही थी। पत्रकार साथ-साथ चलते हुए अतीक से सवाल कर रहे थे। इसी बीच तीन युवक मीडियाकर्मी बनकर पुलिस का सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए आए और अतीक के सिर में गोली मार दी। इसके बाद अशरफ पर फायरिंग की। दोनों वहीं ढेर हो गए।

12वीं के बाद पढ़ाई के लिए विदेश जाना था; पिता का अपराध बना रोड़ा, जानिए पूरी कहानी

माफिया अतीक अहमद के बेटे असद और उसके गुर्गे गुलाम मोहम्मद को यूपी एसटीएफ ने झांसी में मार गिराया। असद ने ही उमेश को मारने की साजिश रची और फिर प्रयागराज में दिनदहाड़े अपने गुर्गों के साथ उनकी हत्या कर दी। असद लखनऊ के एक नामी कॉलेज से 12वीं करने के बाद पढ़ाई के लिए विदेश जाना चाहता था। लेकिन परिवार के आपराधिक रिकॉर्ड की वजह से पासपोर्ट क्लियर नहीं हो रहा था।

उमेश पाल हत्याकांड में CCTV फुटेज के जरिए पुलिस काे मिला एक और सुराग

प्रयागराज के उमेश पाल हत्याकांड के 13 दिन बाद पुलिस को एक और सुराग मिले हैं। 24 फरवरी की शाम जिस समय उमेश पाल की हत्या की गई थी उस समय माफिया अतीक अहमद के बेटे असद के साथ उसका एक दोस्त भी क्रेटा कार में बैठा था। हत्या के समय वह कार से नीचे नहीं उतरा था। पुलिस का मानना है कि उसे बैकअप में रखा गया था।

असद से कहा- चलाओ गोली, धड़ाधड़ फायरिंग करके खाली कर दी मैगजीन

उमेश पाल हत्याकांड के बाद माफिया अतीक अहमद और उसके बेटे सुर्खियों में हैं। CCTV में उमेश पर गोलियां दागता अतीक का बेटा असद दिख रहा है। ऐसे में एक और वीडियो वायरल हो रहा है। जिसको लेकर दावा है कि वो असद के बचपन का है। इसमें अतीक अहमद की आवाज है कि चलाओ गोली।

बड़ा माफिया बनने अतीक-अशरफ को उतारा मौत के घाट, पूछताछ में बोले हत्यारे

प्रयागराज यूपी गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ की सनसनीखेज हत्या के बाद यूपी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं. योगी सरकार ने इस हत्याकांड के उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं और पूरे प्रदेश में धारा 144 लागू कर दी गई है. इस बीच बड़ा खुलासा हुआ है और यह बात सामने आई है कि अतीक और अशरफ की हत्या करने वाले तीनों आरोपी प्रयाग राज के बाहर के रहने वाले हैं. अतीक और अशरफ पर गोली चलाने वाले तीनों आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है. पुलिस इस बात की जांच में जुटी है कि आरोपियों पर पहले कहां-कहां और किस तरह के मामले दर्ज हैं. पूछताछ में आरोपी बता रहे हैं की वो बड़ा माफिया बनना चाहते हैं इसलिए वारदात को अंजाम दिया. आरोपियों ने बताया, 'कब तक छोटे मोटे शूटर रहेंगे, बड़ा माफिया बनना है इसलिए हत्याकांड को अंजाम दिया.' हालांकि पुलिस अभी पूरी तरह से इनके बयानों पर भरोसा नहीं कर रही है क्योंकि तीनों के बयानों में विरोधाभास है. पूछताछ जारी है.

सूत्रों के मुताबिक अब तक की पूछताछ में पता चला है कि अतीक और अशरफ की हत्या करने वाला लवलेश तिवारी बांदा का रहने वाला है जबकि अरुण मौर्य हमीरपुर का निवासी है. वहीं तीसरा आरोपी सनी कासगंज जनपद से है. पूछताछ में तीनों आरोपियों ने अपना यही पता बताया है और इसके बाद पुलिस इनके बयानों को वेरिफाई कर रही है. जांच में एक बात तो साफ हो गई है कि तीनों आरोपी अतीक और अशरफ की हत्या के मकसद से ही प्रयागराज आए थे.

इंस्पेक्टर धुमलगंज राजेश मौर्य की टीम अतीक अहमद को लाई थी. वही सबसे सीनियर अफसर थे जो अतीक और अशरफ को लाए थे. अतीक अहमद और अशरफ को मारने के लिए हमलावर जिस बाइक Up 70M7337 से आए थे वो vahan app पर सरदार अब्दुल मन्नान खान के नाम से रजिस्टर बता रही है.यह नंबर हीरो होंडा की पुरानी गाड़ी Cd 100ss बाइक पर दर्ज है, जिसे 3 जुलाई 1998 को cash में खरीदा गया था. क्या ये नंबर फर्जी तो नही इसकी भी जांच की जाएगी? बाइक कहां से लाई गई,किसकी है इसकी जांच जारी है. इसके अलावा कैमरा कहां से लिया? फेक कैमरा है या कही से खरीद कर लाये इसकी जांच की जाएगी.फोरेंसिक टीम के 5 अधिकारी मौके पर हर सबूत जुटा कर मौके से रवाना हुए.की पुरानी गाड़ी Cd 100ss बाइक पर दर्ज है, जिसे 3 जुलाई 1998 को cash में खरीदा गया था. क्या ये नंबर फर्जी तो नही इसकी भी जांच की जाएगी? बाइक कहां से लाई गई,किसकी है इसकी जांच जारी है. इसके अलावा कैमरा कहां से लिया? फेक कैमरा है या कही से खरीद कर लाये इसकी जांच की जाएगी.फोरेंसिक टीम के 5 अधिकारी मौके पर हर सबूत जुटा कर मौके से रवाना हुए.

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