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सोमवार, 16 जनवरी 2023

मकर संक्रांति पर किन्नर संतों ने लगाई संगम में डुबकी, जोशीमठ संकट टलने की मांगी मन्नत

प्रयागराज क़े माघ मेला के दूसरे स्नान पर्व मकर संक्रांति के मौके पर किन्नर अखाड़े ने भी संगम के तट पर पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई. हर-हर गंगे और ओम नमः शिवाय का उद्घोष करते हुए किन्नर संत गंगा के तट पर पहुंचे और गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी के संगम में डुबकी लगाई. इस मौके पर किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी उर्फ टीना मां और वैष्णवी नंदगिरी समेत दूसरे किन्नर संतो ने जोशीमठ में आई त्रासदी से मुक्ति और वैश्विक महामारी कोरोना के खात्मे के लिए मां गंगा और यमुना से प्रार्थना की. किन्नर अखाड़े ने इसके साथ ही विश्व कल्याण की भी कामना की.किन्नर अखाड़े का अस्तित्व पिछले कुछ साल में उभरकर सामने आया है. किन्नर अखाड़ा का गठन साल 2013 में किया गया. सबसे पहले 2016 के उज्जैन में हुए कुंभ मेले के दौरान पहली बार किन्नर अखाड़ा चर्चा में आया था. इसके बाद 2019 में प्रयागराज के कुंभ मेले में किन्नर अखाड़े ने जूना अखाड़े से मिलकर अपनी जोरदार मौजूदगी दर्ज कराई थी. किन्नरों के संत बनने का रास्ता इस अखाड़े के बनने के बाद से खुल गया है. किन्नर संत समलैंगिक समुदाय के वे लोग हैं, जिन्होंने संन्यास ले लिया है. प्रयाराज में मकर संक्रांति के मौके पर किन्नर संतों ने विश्व में शांति और देश की प्रगति की भी मां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती से कामना की.किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी उर्फ टीना मां के मुताबिक इस बार भी माघ मेले में किन्नर अखाड़े का शिविर लगा है. जहां पर प्रतिदिन यज्ञ अनुष्ठान और शत-चंडी जाप हो रहा है. किन्नर संतों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे माघ मेले में आए साधु-संतों का दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करें. यहां आए ज्यादातर किन्नर संतों का समय पूजा-पाठ, भजन और हवन में बीतता है. इन किन्नर संतों को उनकी लाल-सफेद साड़ी से पहचाना जा सकता है.औपचारिक मान्यता देने वाली संस्था अखाड़ा परिषद ने किन्नर अखाड़े को औपचारिक मान्यता देने से इनकार कर दिया. अखाड़ा परिषद का साफ कहना है कि सनातन परंपरा में केवल 13 अखाड़ों को ही मान्यता है. किन्नर अखाड़े को 14वें अखाड़े की मान्यता मिलने का सवाल ही नहीं है. अखाड़ा परिषद का कहना है कि हिंदू धर्म की संन्यास परंपरा में किन्नरों को संन्यास लेने का अधिकार नहीं है. अगर किन्नरों ने किसी प्रलोभन या लाभ के लिए संन्यास की पंरपरा को अपनाने का काम किया है, तो ये किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता है.किन्नर अखाड़ा के बनने के दौरान उसके लिए जुटे लोगों को अपने ही समाज का विरोध भी झेलना पड़ा था. माघ मेला में किन्नर संतों के शिविर लगे हैं. इनके शिविरों में लोग दर्शन करने और आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं. उज्जैन में अध्यात्म वाटिका नामक किन्नर संतों का एक आश्रम भी है. ये आश्रम करीब 2 एकड़ में फैला हुआ है. यहां पर किन्नर संतों को अपनी पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना करने की सभी सुविधाएं मौजूद हैं. जूना अखाड़े से गठजोड़ करने के बाद किन्रर संतों को बहुत समर्थन मिला है.

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