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गुरुवार, 26 जनवरी 2023

गणतंत्र दिवस विशेष / भारतीय गणतंत्रात्मक व्यवस्था से पूर्व प्रभावी था अंग्रेजों का संविधान

                 (अंजलि श्रीवास्तव)
        किसी भी देश के संविधान की रचना मात्र एक दिन की उपज नहीं होती। संविधान उसके राजनीतिक व्यवस्था का बुनियादी साँचा-ढाँचा निर्धारित करता है। इसी के तहत ही उस देश की जनता शासित होती है। यह राज्य की विधायिका कार्यपालिका और न्यायपालिका जैसे प्रमुख अंगों की स्थापना करता है। इनकी शक्तियों की व्याख्या करता है तथा इनके दायित्त्वों का निर्धारण व सीमांकन करता है।
          संविधान की मूलभूत अवधारणाओं को आत्मसात करते हुए राष्ट्र सतत उन्नयन की दिशा तय कर रहा है। देश के अपने इस संविधान से पूर्व अनेक संविधान विविध रूपों में भारतभूमि पर विद्यमान रहे हैं। आज उनके सन्दर्भों को जानना इसलिए ज़रूरी हो जाता है कि हमारा अपना संविधान उनसे कितना साम्य और पृथक है।
       पूर्व शताब्दियों के कालखंड का अवलोकन करें, तो ध्यातव्य है कि हमारे देश में सिर्फ अंग्रेज ही नहीं, बल्कि और भी यूरोपीय कंपनियों का आगमन था। वस्तुतः भारत कोई खोया हुआ देश नहीं था, लेकिन विभिन्न देशों के यात्री समुद्री मार्ग से भारत आए, इसलिए खोज शब्द का इस्तेमाल किया गया । यह खोजयात्रा 1492 में कोलंबस ने शुरू की भारत की खोज के लिए, और वह अमेरिका खोज कर लेता है। 1498 में पुर्तगाली वास्कोडिगामा निकलता है भारत की खोज के लिए, और 1498 में वह भारत पहुँचता है।
       हमारे देश की राजव्यवस्था पर सबसे ज्यादा प्रभाव अंग्रेजों का रहा। 1600 ईस्वी में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा कंपनी को 15 वर्षों के लिए विशेषाधिकार प्रदान किया गया।
      भारत के संवैधानिक विकास का पहला चरण कंपनी रूल 1773 से 1857 मन गया है। 1773 रेगुलेटिंग  एक्ट के अंतर्गत ईस्ट इंडिया कंपनी को 20 वर्ष का व्यापारिक एकाधिकार प्रदान किया गया। 1774 में  कोलकाता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई। कार्यपालिका एवं  न्यायपालिका की शुरुआत भारत हुई। विधि विनिर्माण में 1781 एक्ट आफ सेटेलमेंट- जिसे हम संशोधनात्मक अधिनियम कहते हैं, की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
       इसके बाद पिट्स इंडिया अधिनियम-1784 के अंतर्गत एक नियंत्रक मंडल का गठन किया गया और दूसरा महत्वपूर्ण कार्य, ईस्ट इंडिया कंपनी से व्यापार और प्रशासन को अलग कर दिया गया।1793 का चार्टर अधिनियम- ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को 20 वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया। 1793 में ही लार्ड कार्नवालिस के द्वारा इंडियन सिविल सर्विस की स्थापना किया गया। यही कारण है 21 अप्रैल को हम नागरिक सेवा दिवस के रूप में मनाते हैं। 1813 में चार्टर एक्ट के अंतर्गत तीन महत्वपूर्ण कार्य हुए-
- पहला ईसाई मिशनरियों का भारत आगमन।
- दूसरा- भारतीय शिक्षा के विकास के लिए एक लाख रुपए की राशि।
- तीसरा- ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त करना, केवल दो व्यापारिक एकाधिकार छोड़कर एक चाय का व्यापार दूसरा चीन के साथ व्यापार। इसका तात्पर्य यह कि अब कोई भी भारत आकर व्यापार कर सकता था।
      1833 के चार्टर एक्ट के तहत कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया गया। 1835 में अंग्रेजी को भारत की अधिकारिक भाषा बनाई गयी। 1853 में ही नागरिक सेवाओं के लिए लिखित परीक्षाओं की शुरुआत की गई।
        दूसरा चरण में क्राउन का शासन 1858 से 1847 तक का है। इसे महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र भी कह सकते हैं। जिसे इलाहाबाद के मिंटो पार्क में पढ़ा गया था। यहाँ 1885 में कांग्रेस की स्थापना महत्त्वपूर्ण है। 1919 मांटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार अधिनियम लाया गया। यह अधिनियम भारतीय संवैधानिक विकास में काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
1935  में भारत शासन अधिनियम लाया गया। अब तक पारित सभी अधिनियमों में यह अधिनियम सबसे बड़ा अधिनियम था। ऐसा माना जाता है कि जब भारत का संविधान बना उस पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इस अधिनियम का व्यापक प्रभाव दिखाई पड़ता है। इस एक्ट के द्वारा भारत में सर्वप्रथम संघात्मक शासन व्यवस्था का निर्णय लिया गया। अंग्रेज हमें भले अधिकार देते थे, लेकिन उसे इस तरह बना कर देते थे जैसे साँप के गले में फँसी छछूंदर।
        परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत विधान है। 1442 आते-आते भारत के जनता में पूर्ण आजादी के प्रति ललक पैदा हो गई। 4 जुलाई 1947 को इंग्लैंड के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने भारत स्वतंत्रता अधिनियम पेश किया। सदन में बहस के बाद 14 जुलाई 1947 को पारित हुआ। 18 जुलाई 1947 को सम्राट ने उस पर हस्ताक्षर किया और कहा गया कि भारत और पाकिस्तान जब तक अपने अपने संविधान का निर्माण नहीं कर लेते तब तक उनका शासन भारत शासन अधिनियम 1935 के एक्ट के अनुसार चलाया जाएगा।
     यही कारण था कि भारत का अपना संविधान बनाने के बाद  26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। 25 जनवरी,1950  तक भारत शासन अधिनियम के अनुसार देश चला और इसी कि छाया में राष्ट्र का अपना संविधान बना।

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