● भारत को विश्व का श्रेष्ठ राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं को आना होगा आगे।
● राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प लेना होगा प्रत्येक युवा को।
● सोशल मीडिया का उपयोग राष्ट्रहित के लिए करना होगा।
भ्रष्टाचार को दिनोंदिन फलते फूलते देख यह चिंता होना स्वाभाविक हो जाता है कि क्या इसे समाप्त नहीं किया जा सकता है? इसके बढ़ते रहने के कारण क्या है? इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले लोग कौन हैं ? भ्रष्टाचार को समाप्त कैसे किया जा सकता है ? क्या राजनीतिक दल इसे समाप्त कर सकते हैं? क्या आम नागरिक इसे समाप्त करने सहयोग कर सकते हैं ? ये प्रश्न प्रायः सभी बुद्धिजीवियों को विचलित करते हैं और वे अपनी ओर से इसे उजागर करने का प्रयत्न भी करते हैं। भ्रष्टाचार ने जहां देश को बदनाम किया है वहीं दूसरी तरफ भ्रष्टाचार के कारण देश का विकास उस गति से नहीं हो पा रहा है जिस गति से विकास की कल्पना की गई थी। देश का शायद ही ऐसा कोई विभाग हो जो भ्रष्टाचार से मुक्त हो। भ्रष्टाचार को समाप्त करने के सारे प्रयास व्यर्थ होते जा रहे हैं। भ्रष्टाचार से जुड़े कानून बनाए जाने के बाद भी यदि ये अपना प्रभाव नहीं दिखा पा रहे हैं और भ्रष्टाचार कम नहीं हो पा रहा है तो समस्या कहाँ हैं?
उपरोक्त प्रश्नों पर जब भी चिंतन किया यही पाया कि इसे बढ़ने देने में आम आदमी की भी भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी की विभागीय कर्मचारियों की। रिश्वत देने वाले भी दो तरह के लोग होते हैं एक तो वे लोग जो अवैधानिक काम करते हैं और कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए रिश्वत देते हैं । दूसरे वे लोग होते हैं जो वैधानिक कार्य तो करते हैं किंतु अपना कार्य जल्दी करवाने के प्रयास में धन देते हैं। अवैधानिक कार्य करने वाले कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए रिश्वत देते हैं यह तो उनकी मजबूरी है किंतु वैधानिक कार्य करने वाले व्यक्ति जब रिश्वत देते हैं तो उनकी कौन सी मजबूरी होती है। इनके कार्यों को विभिन्न कागजों की कमी का बहाना बनाकर ही कर्मचारी रोक सकते हैं किंतु यदि ये थोड़ा सा साहस करें तो अधिकारी उनके कार्यो को करने के लिए मजबूर होंगे क्योंकि वे रिश्वत लेकर इतने अवैधानिक कार्यो में सहयोग कर चुके होते हैं कि यदि उन्हें उनकी याद दिलायी जाए तो अधिकारी कार्य करने के लिए मना नहीं कर सकेंगे। वैधानिक कार्य करने वाले लोग जब रिश्वत देते हैं तब कर्मचारियों में यह आदत पनपती है कि बिना रिश्वत लिए कोई कार्य नहीं करना है। रिश्वत देने वाले यह क्यों नहीं सोचते कि उनके रिश्वत देने से कितने लोगों की परेशानी उठानी पड़ती है। यदि सभी इस बात की शपथ ले कि हम रिश्वत देंगे ही नहीं तो शायद यह समस्या स्वतः समाप्त हो जाएगी।
दूसरे प्रश्न पर चिंतन करने से यह ज्ञात होता है कि इससे प्रभावित होने वाले सबसे अधिक वह लोग होते हैं जो राजनीति से वास्ता नहीं रखते चाहे ग्रामीण व्यक्ति हो या शहरी क्योंकि सत्तापक्ष के नेता या उसके रिश्तेदार से कोई अधिकारी रिश्वत मांग नहीं सकता और विपक्षी नेता से इस बात का डर कि कहीं विवाद न खड़ा हो जाए और पोल खुल जाए। वकील से डरते कि कहीं मुकदमा न कर दे। पत्रकार से डरते हैं कहीं पोल न खोल दे। यदि भ्रष्टाचार की आग में जलता है तो आम आदमी । उनके विकास के लिए बनी योजनाओं का लाभ उन्हें इसलिए नहीं मिल सकता क्योंकि वे रिश्वत नहीं दे सकते, नेता, वकील या पत्रकार नहीं है। उन योजनाओं का लाभ उन्हीं के बीच से निकले वे लोग ले जाते हैं जो रिश्वत देने में सक्षम हो गये हैं या नेता जी की जी हुजूरी करते है या वकील अथवा पत्रकार बन गये हैं। आम आदमी वहीं का वहीं है।
भ्रष्टाचार को ललकारना युवाओं का फर्ज है। वे देश का भविष्य हैं। युवाओं की प्रकृति, कार्य और व्यवहार देखकर परिवार, गाँव, समाज और देश के भविष्य का अनुमान लगाया जा सकता है। इन तथ्यों से परिचित जिन नेतृत्व कर्ताओं ने युवा शक्ति का सही उपयोग किया वे विकसित राष्ट्र बन गये और सोने की चिड़िया कहा जाने वाला हमारा देश भ्रष्टाचार के कारण विकासशील ही बना हुआ है। क्रांति का नेतृत्व सदैव युवाओं ने किया है। आजादी से पहले युवाओं का लक्ष्य देश को आजाद कराना था। युवाओं ने अपने-अपने ढंग से इसके लिए प्रयास किए और देश आजाद कराया। आजादी के बाद देश भ्रष्टाचार जैसी तमाम समस्याओं से आज भी जूझ रहा है तो इसका कारण युवा शक्ति का इस समस्या को दूर करने से पीछे हटना है। युवा शक्ति का प्रयोग विभिन्न राजनीतिक दल अपने राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए अपने-अपने ढंग से कर रहे हैं।
विभिन्न विभागों में व्याप्त भ्र्ष्टाचार की इस समस्या को यदि कोई समाप्त कर सकता है तो वह है युवा क्योंकि आम आदमी मुसीबत से बचना चाहता है। वह भ्रष्टाचार पर चर्चाएं तो कर सकता है। नीति नियंताओं और शासक की आलोचना कर सकता है परंतु आगे बढ़कर एक शिकायती पत्र तक लिखना नहीं चाहता है। उसे इन सब बातों के लिए समय भी नहीं है। भले ही वह रिश्वत पर रिश्वत ही क्यों न देता रहे किन्तु युवा जिम्मेदारियों से मुक्त है, उसमें उर्जा है यदि वह उस ऊर्जा का उपयोग इस समस्या को समाप्त करने में लगा देता है तो निश्चित ही यह समस्या समाप्त होगी क्योंकि उसके पास सोशल मीडिया जैसा शक्तिशाली हथियार है। आज अधिकांश युवाओं के पास इस तरह के मोबाइल है जो आसानी से आसपास के होने वाली घटनाओं को रिकॉर्ड कर सकते हैं। उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर सकता है। युवा अपने मोबाइल का उपयोग गेम खेलने की अथवा गाने सुनने की बजाय इन सब बातों के लिए इस्तेमाल कर सकते है। जिस दिन युवाओं ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध सोसल मीडिया का उपयोग करना शुरू कर दिया उस दिन से अधिकारियों अथवा कर्मचारियों में गलत न करने का डर बैठना शुरू हो जायेगा। मैंने आज भी देखा है कि अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत तो लेना चाहता है साथ ही वह समस्याओं से भी बचना चाहता है। यदि उसे लगता है की रिश्वत लेने से कोई मुसीबत आ जाएगी तो वह कार्य आसानी से कर देता है। इसी का लाभ लेकर नेता वकील अथवा पत्रकार अपना कार्य आसानी से करा लेते हैं आम आदमी वहीं का वहीं रह जाता है।
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