Breaking

बुधवार, 16 नवंबर 2022

शिव और सती का प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

पश्चिम शरीरा कौशाम्बी पश्चिम सरीरा कस्बे में माधुरी केसरवानी द्वारा शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया है कार्यक्रम में कथावाचक अनूप तिवारी राम जी महाराज ने शिव महापुराण सती प्रसंग पर मंगलवार को चर्चा की है कथा वाचक ने कहा कि दक्ष प्रजापति की सभी पुत्रियां गुणवान थी। फिर भी दक्ष के मन में संतोष नहीं था वे चाहते थे, उनके घर में एक ऐसी पुत्री का जन्म हो, जो सर्वशक्ति संपन्न हो एवं सर्व विजयी हो। दक्ष एक ऐसी ही पुत्री के लिए तप करने लगे। तप करते-करते अधिक दिन बीत गए, तो भगवती आद्या ने प्रकट कर कहा कि मैं तुम्हारे तप से प्रसन्न हूं। दक्ष ने तप करने का कारण बताया, मां बोली मैं स्वयं पुत्री रूप में तुम्हारे यहां जन्म धारण करुंगी। मेरा नाम सती होगा मैं सती के रूप में जन्म लेकर अपनी लीलाओं का विस्तार करुंगी। भगवती आद्या ने सती रूप में दक्ष के यहां जन्म लिया। सती दक्ष की सभी पुत्रियों में सबसे आलौकिक थी। बाल्यवस्था में ही ऐसे आलौकिक आश्चर्य चकित करने वाले कार्य दिखाएं थे, जिन्हें देखकर स्वयं दक्ष को भी विस्मयता होती रहती थी। जब सती विवाह योग्य हो गई, तो दक्ष को उसके लिए वर की चिता होने लगी। उन्होंने ब्रह्मा जी से इस विषय में परामर्श लिया। ब्रह्मा जी ने कहा कि सती आद्या की अवतार है। आदि शक्ति और शिव आदि पुरुष है। सती के विवाह के लिए शिव ही योग्य और उचित वर है। दक्ष ने ब्रह्मा जी की बात मानकर सती का विवाह भगवान शिव के साथ कर दिया। सती कैलाश में जाकर भगवान के साथ रहने लगी। इस मौके पर आयोजक माधुरी केशरवानी मंजीत सोनी, विश्वनाथ , पवन केशरवानी, हर्ष, ऋषभ केशरवानी, रोहित गुप्ता, उत्सव, रजत सोनी, शिवम केशरवानी, कपिल जयसवाल,सहित भारी संख्या में महिला पुरुष भक्त मौजूद रहे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Comments