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बुधवार, 18 फ़रवरी 2026

Lmp. जिलेभर में परिषदीय स्कूलों में हुई पीटीएम, अभिभावकों ने थामा जिम्मेदारी का हाथ

*डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के पहल पर जिलेभर में परिषदीय स्कूलों में हुई पीटीएम, अभिभावकों ने थामा जिम्मेदारी का हाथ

*सर्वाधिक उपस्थिति वाले छात्रों के अभिभावकों को सम्मान मिला, कम उपस्थिति वालों से हुआ संवाद*

*पीटीएम में बच्चों की पढ़ाई और नियमित उपस्थिति पर जोर

*फील्ड में उतरे अफसर, दिनभर रही हलचल

लखीमपुर खीरी, 18 फरवरी। डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल बुधवार को पूरे एक्शन मोड में नजर आईं। सुबह-सुबह खंड विकास अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर उन्होंने साफ संदेश दे दिया कि फॉर्मर आईडी अभियान में ढिलाई नहीं चलेगी और स्कूलों में उपस्थिति सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए।

बैठक में डीएम ने फॉर्मर रजिस्ट्री की प्रगति तेज करने के निर्देश दिए और जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों में शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए सख्त रणनीति तय की। कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार सिर्फ आदेश से नहीं, मैदान में उतरकर ही संभव है।

*फील्ड में उतरे अफसर, दिनभर रही हलचल

डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के निर्देश मिलते ही अधिकारी और बीडीओ फील्ड में निकल पड़े। कहीं फॉर्मर आईडी बनाने के आंकड़ों की पड़ताल हुई तो कहीं स्कूलों में बच्चों की हाजिरी और पढ़ाई का स्तर परखा गया। विद्यालयों में आयोजित पैरेंट-टीचर मीटिंग में अफसरों ने अभिभावकों से सीधा संवाद कर बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति और स्कूल के माहौल पर फीडबैक लिया। डीएम ने दो टूक कहा कि सिर्फ उपस्थिति बढ़ाना लक्ष्य नहीं, कक्षाओं में गुणवत्ता दिखनी चाहिए। दिनभर की मॉनिटरिंग के दौरान वह खुद भी अपडेट लेती रहीं, जिससे अफसरों में हलचल बनी रही। सुबह की बैठक से लेकर शाम तक चले इस अभियान ने साफ कर दिया कि जिले में अब योजनाओं की प्रगति फाइलों से निकलकर सीधे जमीन पर परखी जाएगी।

*..जब स्कूल बना संवाद का मंच, अभिभावकों ने थामा जिम्मेदारी का हाथ

जिले के परिषदीय विद्यालयों में बुधवार को आयोजित विशेष अभिभावक बैठकों ने स्कूलों को जीवंत संवाद का केंद्र बना दिया।
डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के निर्देश पर हुई इस पहल का उद्देश्य स्पष्ट था कि हर बच्चा रोज़ स्कूल आए और पढ़ाई में गुणवत्ता दिखे।

बैठक में सर्वाधिक उपस्थिति दर्ज कराने वाले 10 छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सम्मानित किया गया। मंच से उनका उदाहरण पेश कर संदेश दिया गया कि नियमित उपस्थिति ही सफलता की पहली सीढ़ी है। वहीं जिन बच्चों की उपस्थिति कम रही, उनके अभिभावकों से सीधा संवाद कर जिम्मेदारी का अहसास कराया गया। अब एक भी दिन बेवजह अनुपस्थित नहीं-ऐसा संकल्प दिलाया गया।

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