🔘 संगठन की शक्ति ही हमारी पहचान, सदस्यता विस्तार को बनाएं जनआंदोलन : राजवीर सिंह
जनजागरण डेस्क। संगठन केवल नामों की सूची नहीं होता, वह विचारों की धड़कन और सेवा का संकल्प होता है। इसी भावभूमि पर भारत विकास परिषद के क्षेत्रीय संयोजक (सम्पर्क), अवध एवं नैमिष प्रांत, राजवीर सिंह ने परिषद की सदस्यता विस्तार को संगठन का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि परिषद निरंतर विस्तार की दिशा में अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि शाखाओं की संख्या बढ़ना निश्चित ही गौरव का विषय है, परंतु इसके साथ साथ सदस्यता विस्तार पर भी समान रूप से ध्यान देना अनिवार्य है। वर्तमान समय में शाखाओं में निरंतर घटती सदस्य संख्या (ड्रॉपेज) एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आई है। यह केवल आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि संगठन की ऊर्जा और सक्रियता से जुड़ा प्रश्न है। अतः इस पर गहन विचार-विमर्श और ठोस कार्ययोजना बनाना समय की मांग है। श्री सिंह ने प्रेरणादायी स्वर में आह्वान किया आइए, हम सभी मिलकर नए सदस्यों को जोड़ने का सतत अभियान चलाएं। पूर्व सदस्यों से पुनः आत्मीय संपर्क स्थापित करें। शाखा गतिविधियों को अधिक प्रभावी, आकर्षक और परिणामकारी बनाएं। तथा प्रत्येक सदस्य की सक्रिय और सार्थक सहभागिता सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि संगठन की सशक्तता ही हमारी सामूहिक ऊर्जा, प्रतिबद्धता और सेवा भावना का परिचायक है। जब प्रत्येक सदस्य स्वयं को परिषद की धड़कन समझेगा, तभी संगठन की गति और प्रगति दोनों सुनिश्चित होंगी। राजवीर सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि एकजुट प्रयासों, समर्पित नेतृत्व और सतत संवाद से सदस्यता वृद्धि एवं संगठन विस्तार के लक्ष्य को निश्चित ही प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने नवीन शाखा “समृद्धि” के दायित्वधारियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि वे परिषद की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए सेवा, संस्कार और संगठन के सूत्र को और अधिक सुदृढ़ करेंगे। संदेश स्पष्ट है जब संगठन सशक्त होगा, तभी समाज समर्थ होगा; और जब समाज समर्थ होगा, तभी राष्ट्र प्रगति के पथ पर दृढ़ता से अग्रसर रहेगा।
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