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सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

भारत विकास परिषद का दिव्यांग शिविर बना सेवा, संवेदना और समर्पण का संगम

🔘 भारत विकास परिषद का दिव्यांग शिविर बना सेवा, संवेदना और समर्पण का संगम

कानपुर। संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण इन पाँच जीवन मूल्यों को व्यवहार में उतारते हुए भारत विकास परिषद, कानपुर ब्रह्मव्रत प्रांत की कृष्णा शाखा ने श्री महाराजा अग्रसेन भवन, किदवई नगर में ऐसा सेवायज्ञ रचा, जिसने दिव्यांग जनों के जीवन में नई सुबह का प्रकाश भर दिया। यह कोई साधारण आयोजन नहीं था, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से सजा वह क्षण था, जहाँ असहायता ने आत्मविश्वास का हाथ थामा और निराशा ने आशा की उड़ान भरी।

स्वामी विवेकानंद और भारत माता के चित्रों पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्वलन के साथ आरंभ हुए इस भव्य एवं दिव्य दिव्यांग शिविर में सेवा की ज्योति दूर दूर तक प्रकाशमान हुई। लाला देवी चंद्र ग्रोवर निःशुल्क अंग निर्माण केंद्र के सक्रिय सहयोग से 51 दिव्यांग जनों को कृत्रिम अंग प्रदान किए गए। वर्षों बाद जब वे बिना किसी सहारे अपने कदमों पर खड़े हुए, तो आँखों में चमक और होठों पर मुस्कान ने आयोजन को भावनाओं के शिखर पर पहुँचा दिया। शिविर का सबसे मार्मिक क्षण तब आया, जब नैमिष प्रांत से पधारे प्रांतीय महासचिव डॉ. पी. के. गुप्ता के करकमलों से कृत्रिम पैर पाकर एक दिव्यांग महिला ने 23 वर्षों बाद चलने का सुख महसूस किया। घुटनों से ऊपर कटे पैरों के साथ घिसट घिसट कर जीवन जी रही उस महिला की आँखों से बहते आँसू केवल पीड़ा के नहीं, बल्कि पुनर्जन्म की अनुभूति के थे, मानो जीवन ने फिर से उसके कदमों को सहारा दे दिया हो। इस सेवाकार्य में मुख्य अतिथि डॉ. ए. एस. प्रसाद तथा विशिष्ट अतिथियों राजकुमार अग्रवाल, डॉ. श्याम बाबू गुप्ता, डॉ. उमेश पालीवाल, राघवेंद्र वर्मा, सीए भारत भूषण जुनेजा, राकेश श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्यजनों की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमा और ऊर्जा से भर दिया। सभी ने मिलकर यह संदेश दिया कि समाज की सच्ची प्रगति तभी संभव है, जब सबसे कमजोर व्यक्ति को भी अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर मिले। यह शिविर केवल कृत्रिम अंगों का वितरण नहीं था, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और मानवता के पुनर्जागरण का उत्सव था जहाँ सेवा ने संस्कार का रूप लिया और समर्पण ने समाज को नई दिशा दी।

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