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मंगलवार, 11 नवंबर 2025

राजधानी के धमाके की प्रतिध्वनि, सीमांत लखीमपुर खीरी में असुरक्षा का साया

🔘 राजधानी के धमाके की प्रतिध्वनि, सीमांत लखीमपुर खीरी में असुरक्षा का साया

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुए भीषण बम धमाके ने देश की सांसें थाम दी हैं। राष्ट्र की नब्ज़ मानी जाने वाली दिल्ली जब दहशत के साए में कांप उठी, तो उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जनपदों तक उसका कंपन महसूस होना स्वाभाविक है। लखीमपुर खीरी, यह वही धरती है जहाँ खेतों की हरियाली और जीवन की सरलता बसती है, पर अब यही शांति असुरक्षा की आहटों से घिरती जा रही है। नेपाल सीमा से सटा यह ज़िला भौगोलिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। ऐसे में अपराधी तंत्र के लिए यह क्षेत्र पलायन और छिपने की आसान राह बनता जा रहा है। दो दिन पूर्व शहर के मध्य में भाजपा नेता पर हुआ हमला इस बात का स्पष्ट संकेत है कि असामाजिक तत्व अब निर्भीक हो चुके हैं। यह घटना किसी एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि कानून और जनता के विश्वास पर सीधा प्रहार है। जनता का प्रश्न स्वाभाविक है “खुफिया तंत्र की सजगता कहाँ है? प्रशासन हर बार घटना के बाद ही क्यों जागता है? आखिर कब तक आम नागरिक भय में जीता रहेगा?” अब केवल “प्रतिक्रिया” नहीं, बल्कि “पूर्व तैयारी” ही समाधान है।
इसी संदर्भ में भारत विकास परिषद, लखीमपुर एवं लायन्स क्लब लखीमपुर उपकार के पूर्वाध्यक्ष एवं परिषद क्षेत्रीय सचिव (उत्तर मध्य क्षेत्र-२) राजवीर सिंह ने लखीमपुर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताते हुए कहा लखीमपुर की भौगोलिक स्थिति हमें अधिक सजग रहने की मांग करती है। प्रशासन को अब ठोस और त्वरित कदम उठाने होंगे, ताकि असुरक्षा का माहौल समाप्त हो और जनविश्वास पुनः स्थापित हो। श्री राजवीर सिंह द्वारा सुझाए गए आवश्यक कदम इस प्रकार है।  सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती और आधुनिक निगरानी तंत्र विकसित किया जाए, पुलिस गश्त को रात्रिकालीन एवं सघन बनाया जाए, संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित सूचना और एक्शन प्रणाली लागू हो, शहर में सीसीटीवी नेटवर्क और साइबर इंटेलिजेंस को सशक्त किया जाए,  नागरिक सहभागिता पर आधारित जनसुरक्षा समिति” गठित की जाए। श्री सिंह ने आगे कहा सुरक्षा, शासन की पहली जिम्मेदारी है और जनता का विश्वास उसका आधार। यह समय है जब सरकार, पुलिस और प्रशासन को एक स्वर में यह संदेश देना होगा कि लखीमपुर में कानून का राज है डर का नहीं। लखीमपुरवासी एक स्वर में कहते हैं हम चाहते हैं कि प्रशासन निर्णायक कदम उठाए, ताकि हर नागरिक अपने को सुरक्षित महसूस कर सके। लखीमपुर को डर नहीं, विश्वास की पहचान बनाना होगा।

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