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सोमवार, 15 सितंबर 2025

प्रयागराज के किसानों ने तकनीक से जोड़ी खेती, पैदावार में 25 से 35 फीसदी तक की बढ़ोत मचान विधि से खेतों में आई क्रांति

प्रयागराज के किसानों ने तकनीक से जोड़ी खेती, पैदावार में 25 से 35 फीसदी तक की बढ़ोत मचान विधि से खेतों में आई क्रांति

प्रयागराज कहते हैं किसी भी क्षेत्र को विकास की राह पर ले जाना हो तो उसमें तकनीक का तड़का ज़रूरी है। यही तस्वीर अब प्रयागराज के गांवों में देखने को मिल रही है।यहां के अन्नदाता अब पुरानी परंपरागत पद्धति छोड़कर बेल वाली सब्जियों की खेती में मचान विधि को अपनाकर खेती की दिशा ही नहीं, दशा भी बदल रहे हैं। पहले कीट, रोग और बारिश से फसलें चौपट हो जाती थीं। खेत में फैली बेलें जलजमाव और सड़न की शिकार होती थीं। किसान मेहनत से हताश हो जाते थे। लेकिन जब से मचान विधि को अपनाया गया है, किसान चिंताओं से आज़ाद होकर न सिर्फ स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण फसल उगा रहे हैं, बल्कि बाजार में उसकी कीमत भी बेहतर मिल रही है। जिले के गंगापार और यमुनापार के लगभग 50 गांवों में किसान अब बड़े पैमाने पर कुंदरू, नेनुआ, पवल जैसी बेल वाली सब्जियां मचान विधि से उगा रहे हैं। दरोगापुर, सेमरी, शिवगढ़, सेवैथ, अलमसराय और साधनगंज जैसे गांवों में तो इस विधि ने खेती की तस्वीर बदल दी है। दरोगापुर के फूलचंद्र पटेल बताते हैं कि पहले बेलें जमीन पर फैलाई जाती थीं, जिससे बारिश में फसल सड़ जाती थी। अब मचान पर चढ़ाने से रोगों का खतरा खत्म हो गया है। इसी गांव के किसान रूपचंद्र का दावा है कि इस विधि ने उनकी पैदावार लगभग 25 फीसदी तक बढ़ा दी है। जबकि अभय प्रताप सिंह कहते हैं—“चाहे कितनी भी बारिश हो, अब फसल खराब नहीं होती। पिछले दो साल में उत्पादन 35 फीसदी तक बढ़ा है।” शुआट्स के वरीय सहायक मुनीष कुमार सिंह का कहना है कि करीब छह साल पहले किसानों ने इस विधि को अपनाना शुरू किया था। आज धनूपुर, सोरांव और बहरिया जैसे ब्लॉकों में सबसे अधिक किसान मचान विधि से सब्जियां उगा रहे हैं। तकनीकी नवाचार से खेती की यह कहानी बताती है कि अगर किसान समय पर बदलाव को अपनाएं तो न केवल मेहनत बचती है, बल्कि उपज और आय दोनों दोगुनी हो सकती हैं।

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