Breaking

बुधवार, 13 अगस्त 2025

हलषष्ठी, हलछठ, ललही छठ, व्रत 14 अगस्त बृहस्पतिवार,

प्रयागराज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हलछठ का त्योहार मनाते हैं, हलछठ का पर्व जन्माष्टमी से दो दिन पहले मनाया जाता है, इस दिन श्रीकृष्ण भगवान के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन बलराम जी की पूजा की जाती है, बलराम जी का मुख्य शस्त्र हल और मूसल है जिस कारण इन्हें हलधर कहा जाता है, इस साल हलछठ व्रत 14 अगस्त को रखा जाएगा, हलषष्ठी (हलछठ) व्रत को हरछठ या ललही छठ भी कहा जाता है।षष्ठी तिथि प्रारम्भ - 14 अगस्त 2025 को प्रातः काल 5 बजकर 45 मिनट से  आरंभ होकर 15 अगस्त को रात्रि 3 बजकर 24 तक रहेंगी ।पूजन का समय प्रातः काल 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक उत्तम रहेगा।हलछठ व्रत महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुखी जीवन और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं, इस व्रत को करने से संतान के जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस व्रत में बलराम जी के साथ-साथ हल की भी पूजा की जाती है इसलिए हल चले जमीन का अन्न, फल, साग-सब्जी आदि का सेवन करना वर्जित होता है।हलछठ व्रत करने वाली महिलाएं हल से जोती गई फसल की कोई चीज नहीं खाती हैं और न ही जमीन में उगाई हुई कोई चीज खाती हैं, यह व्रत निराहार रखने का विधान है। इस दिन भैंस के दूध, दही और घी का प्रयोग करें, गाय के दूध, दही और घी का प्रयोग न करें।इस दिन माताएं अपने पुत्र के हिसाब से मिट्टी के छोटे कुल्हड़ों में सात भुने हुए अनाज या मेवा भरकर पलाश की एक शाखा को जमीन या गमले में गाड़कर पूजा करती हैं।इस व्रत के लिए महुआ, पसई के चावल, झपला के पत्ते, भैंस का दूध, दही, घी, मिट्टी के छोटे कुल्हड़, सात तरह के अनाज आदि की आवश्यकता होती है।आपका शरीर स्वस्थ्य रहे आप दीर्घायु हों आपका जीवन मंगलमय हो प्रभू की कृपा अनवरत आप पर बनी रहे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Comments