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मंगलवार, 7 मई 2024

खूबसूरत तवायफ ने जब लड़ा चुनाव, कोई मुकाबले को नहीं था तैयार, लेकिन हार का करना पड़ा सामना

लखनऊ।अंग्रेजी हुकूमत में अदब और तहजीब का शहर कहा जाने वाला लखनऊ तवायफों और कोठों के लिए भी विख्यात था।तमाम राजा महाराजा,नवाब और निजाम अधिकतर लखनऊ के कोठों पर शाम की महफिलों में नजर आते थे।उन दिनों लखनऊ के चौक इलाके में एक तवायफ दिलरुबा जान हुआ करती थी,जो बहुत खूबसूरत थी।दिलरुबा जान के चाहने वाले लखनऊ से लेकर आसपास के शहरों तक थे। 1920 में लखनऊ में नगर पालिका का चुनाव होना था।दिलरुबा जान ने कोठे की डेहरी पार कर चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा कर दी।इसके बाद क्या था।दिलरुबा जान के चाहने वालों ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।दिलरुबा जान जब चुनाव प्रचार के लिए निकलतीं तो उसके पीछे भारी भीड़ चलती थी।दिलरुबा जान की सभा में जबरदस्त भीड़ उमड़ने लगी।चुनाव के आखिर तक दिलरुबा जान के मुकाबले मैदान में कोई दूसरा प्रत्याशी नहीं था। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि तमाम ऐसे प्रत्याशी जो चुनाव लड़ना चाहते थे,लेकिन दिलरुबा जान और उसकी लोकप्रियता देखकर पीछे हठ गए।उन दिनों लखनऊ में नामी हाकीम हुआ करते थे नाम था शमसुद्दीन।हकीम शमशुद्दीन भी लखनऊ के चौक के अकबरी गेट इलाके में रहते थे।हकीम शमशुद्दीन के दोस्तों ने उन पर चुनाव लड़ने का दबाव बनाया तो वह तैयार हो गए,लेकिन कुछ दिनों में हकीम शमशुद्दीन को लगने लगा कि चुनाव जीत पाना मुश्किल है। क्योंकि हकीम शमशुद्दीन के पीछे गिने-चुने लोग थे, जबकि दिलरुबा जान के पीछे पूरा हुजूम था।वो दौर चुनावी नारों का था। हकीम शमशुद्दीन ने लखनऊ के तमाम इलाकों में दीवारों पर ऐसा नारा लिखवाया,जो देखते-देखते सबकी जुबान पर चढ़ गया।यह नारा था है हिदायत लखनऊ के तमाम वोटर-ए-शौकीन को, दिल दीजिए दिलरुबा को,वोट शमसुद्दीन को।जब दिलरुबा जान को इस नारे का पता चला तो उसी अंदाज में जवाब देने का फैसला किया। दिलरुबा जान ने चौक से लेकर पुराने लखनऊ की तमाम दीवारों पर लिखवाया है हिदायत लखनऊ के तमाम वोटर-ए-शौकीन को, वोट देना दिलरुबा को, नब्ज शमसुद्दीन को।दिलरुबा जान और हकीम शमसुद्दीन की मीठी नोकझोंक के बीच चुनाव हुए और जब रिजल्ट आया तो सब कुछ पलट चुका था।दिलरुबा जान भले ही लोकप्रिय थीं और उनके पीछे भीड़ थी,लेकिन दिलरुबा जान चुनाव हार गई।हकीम शमसुद्दीन चुनाव जीत गए।चुनाव में हार से दिलरुबा जान बहुत निराश हुई। दिलरुबा जान के कोठे की रौनक गायब गई। दिलरुबा जान ने कहा कि चौक में आशिक कम मरीज ज्यादा हैं।।।

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