● जिला चिकित्सालय मे डायरिया व अन्य बीमारियों से ग्रसित 119 बच्चों का हुआ है सफल इलाज- सीएमओ
● बच्चों में होने वाली कई बीमारियों में होते हैं डायरिया जैसे लक्षण
लखीमपुर खीरी। सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के अंतर्गत अभियान चलाकर उपकेंद्र सहित प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से डायरिया युक्त लक्षणों के बच्चों को चिन्हित करके तत्काल उपचार दिया जा रहा है। इसी क्रम में जिला पुरुष चिकित्सालय में डायरिया सहित अन्य बीमारियों से ग्रस्त 119 बच्चों को इस पखवाड़े के अंतर्गत भर्ती कराया गया है जिनका सफल उपचार किया गया है।
सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता ने बताया कि कई समाचार पत्रों में डायरिया से 3 बच्चों की मौत की खबर प्रकाशित की गई है। इसकी सत्यता जानने के लिए उनके द्वारा 2 सदस्यीय जांच टीम बनाई गई। जिसमें एसीएमओ डॉ. अनिल कुमार गुप्ता और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ आरपी वर्मा द्वारा अभिलेखों की जांच की गई। जिसमें ज्ञात हुआ कि सघन दस्त नियंत्रण अभियान जो 7 जून से 21 जून तक चला। जिसके कारण डायरिया के मामलों का पता लगाने और उन्हें उच्च केंद्रों पर रेफर करने में सुधार हुआ है।
ढाई वर्ष के बच्ची अंशू पाल पुत्री अवधेश कुमार निवासी ग्राम देवरिया ब्लॉक फूलबेहड़ का होंठ कटा हुआ था और तालु भी कटा हुआ था। 18 जून को एस्पिरेशनल निमोनिया के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी न कि डायरिया से। इसी तरह 2 वर्ष की मोनिका पुत्री धनीराम की मृत्यु डिसेंट्री से हुई थी न कि डायरिया से।
साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि जिले में किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रासंगिक दवाएं, आईवी तरल पदार्थ, जिंक और ओआरएस पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। अधीक्षकों को अपने क्षेत्रों में निगरानी सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। आईडीसीएफ अभियान के दौरान हमारी टीमें परिवारों को ओआरएस और जिंक उपलब्ध करा रही हैं और पहचाने गए मामलों को सीएचसी पर भेज रही हैं।
● बच्चों में होने वाली अन्य बीमारियों में भी होते हैं डायरिया जैसे लक्षण
सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने यह भी बताया कि बच्चों में होने वाली कई बीमारियों में उल्टी, दस्त, पेट में दर्द या डायरिया जैसे लक्षण होते हैं। ऐसे में उन बीमारियों से होने वाली मौतों का कारण डायरिया को नहीं माना जा सकता। साथ ही उन्होंने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण भी डिहाइड्रेशन, उल्टी, दस्त, बुखार, पेट दर्द जैसी लक्षण युक्त बीमारियों हो सकती हैं। जिनकी रोकथाम के लिए ग्रामीण स्तर तक आशा एवं आंगनबाड़ी संगिनी द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार कर जरूरत के अनुसार दवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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