मेरे लेख की चोरी हो गयी या खुद लिखने की क्षमता नहीं हैं ! ऐसे वाक्य भी अहम पैदा करते हैं !
ज्ञानी पुरूष जो आचरण करते हैं सज्जन पुरूष ही उसका अनुसरण करते हैं ! वरना अज्ञानी और अधर्मी तो इसका उपहास ही उड़ायेगा ! जिन्हें लिखना नहीं आता वो अच्छी पोस्ट को कापी पेस्ट करके ही अपना और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाते हैं तो इसमें रोष कैसा ?? मैं भी कभी ऐसा मानता था और कहता था कि, खुद की लेखनी पर बल दो...कब तक दुसरो की नकल करोगें ! पर मेरी संगत जब से #त्रिमूर्ति से हुई मेरा नजरिया बदल गया ! और कहते हैं कि, जिसकी संगत से नजरियां, चरित्र और आचरण बदल जाये वो साधारण पुरूष नहीं हो सकते !
ये तो हर्ष की बात हैं कि, आपके लिखे हुऐं पोस्ट को सराहा गया और उसे प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगो तक पहुंचा रहा हैं कोई...! आप खुद भी तो लिखकर उसका प्रचार-प्रसार ही कर रहे हैं ताकि, आपके लिखे हुऐं पोस्ट जन-जन तक पहुंचें ! फिर आपके लिखे हुऐं पोस्ट को दुसरे कापी पेस्ट कर रहे है तो काहे का एतराज है ?? वो भी तो एक तरह से आपका ही प्रचार-प्रसार कर रहा हैं ! मुझे भी जो पोस्ट अच्छी लगती है, वो मैं कापी पेस्ट करके आगे की ओर प्रेषित कर देता हुं ! हां ये स्वीकार करना अपने जमींर को जिंदा रखने का अभिप्राय हैं कि, ये पोस्ट मैंने नहीं लिखी बल्कि, फलाने ने लिखी है ! उसे अपना नाम देना बेईमानी होगी ! या आपका जमींर ही स्वीकार नहीं करेगा ! जैसे मेहनत किसी और की और परितोषिक मेरे नाम...!
प्रिय बंधुगण, हो सकता हैं कि, जो आपके फ्रेण्डलिस्ट में हैं वो मेरे फ्रेण्डलिस्ट में ना हो और आपके लिखे पोस्ट आपकी आईडी तक ही सीमित रह जाये ! मैं तो कई बार आप सभी के लिखे हुऐं पोस्ट को कापी पेस्ट करके सार्वजनिक करता हुं ताकि, और लोग पढ़कर उसका लाभ प्राप्त कर सकें तो इसमें बुराई क्या है....ം??
जहां तक मैं समझता हुं हर अच्छी इबारत लिखी जा चुकी हैं बस उनका पुनरावृति ही समाज को आईना दिखाने जैसा होगा ! सारे तथ्यों का मतलब एक ही होता है बस शब्दों की जादुगरी सबको नहीं आती ! राम और कृष्णजी के शब्द, रहीम और तुलसीदास के दोहे, गालिब का कलाम या किसी शायर की शायरी ये सब देखिये तो एक दुसरे से प्रेरित ही हैं ! बस कहने और लिखने का अंदाज अलग-अलग हैं !
हां यदि कोई लिखता हैं तो ये कोशिश जरूर होनी चाहिये कि, कुछ अलग हटकर लिखेंं बेशक मुद्दा वही हों !
समझ...समझ और सोच...सोच की बात हैं...
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